January 27, 2026
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हरिद्वार प्रेस क्लब में कल एन यू जे आई की नव निर्वाचित बॉडी के शपथ ग्रहण समारोह में अध्यक्षता करते हुए कार्यक्रम में मौजूद पत्रकारों व नगर के गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए जगतगुरु राजराजेश्वरानंद जी महाराज ने कहा की पत्रकारिता कोई हंसी खेल नहीं है, इसके लिए बहुत ही कठिन परिश्रम करने के साथ , पापड़ बेलने की आवश्यकता होती है। जगत गुरु शंकराचार्य खुद भी एक पत्रकार रह चुके हैं ,और उनको हिंदी पत्रकारिता का विशेष कर बहुत ही अच्छा ज्ञान व अनुभव है।

पत्रकारिता करते समय कई हिंदी के राष्ट्रीय व प्रांतीय अखबारों में लिखा करते थे।

राष्ट्रीय दैनिको व प्रांतीय दैनिकों में उनके लेख पहले भी छपा करते थे, और अब भी उनके लिखे अर्टिकलो को हिंदी के अखबार प्राथमिकता से प्रकाशित करते है।

1762877961 737 हिंदी पत्रकारिता कभी खत्म नहीं होगी। पत्रकारों को डिप्लोमा नहीं

स्वामी जगतगुरु शंकराचार्य बहुत ही स्पष्ट वादी संत है, उन्होंने साफ-साफ शब्दों में कहा कि अब जो नेता और ब्यूरोक्रेट भ्रष्ट हो गए हैं, उन्हें भ्रष्ट बनाने की जिम्मेदारी आम जनता की है, यदि आम जनता उनकी मांगे पूरी करना बंद कर दे तो, यह भ्रष्टाचार समाप्त हो सकता है। लेकिन हर व्यक्ति को अपना कार्य कराने की जल्दबाजी है। और शॉर्टकट से हर आदमी अपना काम करवाना चाहता है ,इसीलिए उसको नेताओं और ब्यूरोक्रेट्स की मांग पूरी करनी होती है।

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पत्रकारिता के छेत्र में भी प्रवेश कर गई है कुरुतिया । अखबारों को अपनी विश्वनीयता बनाये रखनी होगी।

कुछ कुरुतिया पत्रकारिता के क्षेत्र में भी आ गई है, जो पहले नहीं हुआ करती थी ,लेकिन अब पत्रकारों को चाहिए कि वह पत्रकारिता करने से पहले काफी अध्ययन कर लिया करें ,तभी जाकर वे सफल पत्रकार बन सकते हैं, क्योंकि पत्रकारिता ऐसा कार्य है जो हमेशा तलवार की धार पर पत्रकार को चलने के लिए मजबूर करता है, शंकराचार्य जी ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि अब मिशनरी पत्रकारिता तो एक तरीके से समाप्त हो गई है अब भौतिकता का युग पत्रकारिता में स्पष्ट दिखाई देता है।

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लेकिन बावजूद इसके पत्रकारिता को मिटाने का जो कु चक्र चल रहा है वह कभी पूरा नहीं होगा, पहले भी एक बार बिहार में पत्रकार काला बिल लाया गया था।

1762877961 702 हिंदी पत्रकारिता कभी खत्म नहीं होगी। पत्रकारों को डिप्लोमा नहींजो सफल नहीं हुआ था, शंकराचार्य जी ने कहा की हिंदी के समाचार पत्र कभी भी बंद नहीं हो सकेंगे ।क्योंकि हिंदी का पाठक आज भी अखबारों के ऊपर ही विश्वास करता है। लेकिन इन अखबारों को भी अपनी विश्वसनीयता बनाए रखनी चाहिए।

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