February 9, 2026
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कहा जाता है कि जहां सद्बुद्धि और सद्गुरु के विचार होते हैं, वहां ईश्वरीय शक्तियां स्वयं उपस्थित हो जाती हैं। इसी भावना को साकार कर दिखाया है बारकोट क्षेत्र के युवाओं ने, जिनके सामूहिक प्रयास और जनसहयोग से पूर्णागिरि के लघु रूप में पूजी जाने वाली लड़ीधुरा की महामाया मां भगवती का भव्य एवं दिव्य मंदिर बहुत कम समय में तैयार हो गया है। मंदिर की दिव्यता को देखकर श्रद्धालुओं को यहां ईश्वरीय अनुभूति होने लगी है।

मां की पूर्णिमा के पावन अवसर पर महामाया मां भगवती को उनके स्थान पर विधिवत पुनर्स्थापित किया जाएगा। इसके लिए प्रातः काल देव डंगरों द्वारा मां की शक्तिपीठ को गंगा स्नान हेतु ले जाया जाएगा। इसके पश्चात सुबह करीब 9:30 बजे मस्टा मंदिर से ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी। कलश यात्रा में महिलाएं पारंपरिक आंचलिक वेशभूषा में मां महामाया के जयकारे लगाते हुए शामिल होंगी। कलश यात्रा के बाद विधिवत पूजा-अर्चना के साथ मां भगवती एवं महाकाली की भव्य-दिव्य मूर्तियों की भी प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। इसके उपरांत भवन यज्ञ आयोजित होगा तथा भंडारे के रूप में प्रसाद वितरण किया जाएगा।

लड़ीधुरा मंदिर निर्माण समिति से जुड़े नागेन्द्र जोशी, जिला पंचायत सदस्य योगेश जोशी व युवाओं द्वारा कार्यक्रम से पूर्व मंदिर परिसर की साफ-सफाई की गई। क्षेत्र में लड़ीधुरा मंदिर की महामाया को श्रद्धालु अपने इष्टदेव के रूप में पूजते हैं। अब इस स्थान के सड़क मार्ग से जुड़ जाने के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।



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