January 27, 2026
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हरिद्वार को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित जहां लगातार मैदान में उतरकर सफाई अभियानों पर जोर दे रहे हैं, वहीं नगर निगम इस मुहिम को जमीन पर उतारने के बजाय पीछे खींचता नजर आ रहा है। यह आरोप किसी बयान या राजनीतिक टिप्पणी से नहीं, बल्कि खुद नगर निगम परिसर में पसरी गंदगी की तस्वीरों से साबित हो रहा है।नगर निगम कार्यालय परिसर में फैला कूड़ा साफ-साफ यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर स्वच्छता अभियान किसके लिए है। जिस निगम पर शहर की सफाई, निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी है, वही अपने ही आंगन में कूड़े के ढेर के बीच बैठकर आदेश जारी करता नजर आ रहा है।IMG 20260112 WA0034हर की पौड़ी, जिसे स्वच्छता और आस्था का प्रतीक माना जाता है, वहां से जब्त किया गया प्लास्टिक, केन और कचरा आज नगर निगम की कार्यशैली का आईना बन चुका है। यह कूड़ा किसी सुनसान जगह पर नहीं, बल्कि नगर निगम कार्यालय परिसर में महीनों से पड़ा है और अब खुद बदबू और बीमारी का कारण बनता जा रहा है।सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कार्रवाई के नाम पर हर की पौड़ी से उठाया गया कचरा निगम कार्यालय तो पहुंचा, लेकिन उसके बाद निस्तारण की जिम्मेदारी कहीं गुम हो गई। न सफाई, न हटान, न जवाब सिर्फ कूड़े के ढेर और सिस्टम की चुप्पी।ias nandan kumarसवाल सीधे नगर निगम आयुक्त नंदन कुमार पर उठ रहे हैं। क्या उन्हें यह जानकारी नहीं कि उनके कार्यालय परिसर में कचरे का अंबार लगा है, या फिर नियम-कानून केवल शहर की गलियों, दुकानदारों और आम नागरिकों के लिए बने हैं? नगर निगम जहां एक ओर स्वच्छता के नाम पर जनता को नोटिस थमाता है, चालान काटता है और अभियान चलाता है, वहीं दूसरी ओर अपने ही परिसर की सफाई करने में असफल नजर आ रहा है। यह तस्वीरें साफ संकेत दे रही हैं कि यहां कार्रवाई दिखती है, लेकिन जिम्मेदारी कहीं दिखाई नहीं देती।har ki pauri activity image.jpg.imgw .1280.1280शहर में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी किसी विशेष “इम्यूनिटी” के दायरे में हैं, जहां न गंदगी का असर होता है और न ही जवाबदेही का डर।तीर्थनगरी हरिद्वार में अगर नगर निगम का कार्यालय ही डंपिंग जोन बन जाए, तो फिर आम जनता से स्वच्छता की उम्मीद करना कितना जायज है,यह सवाल अब शहर की हर गली और हर तस्वीर में तैर रहा है।

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