January 24, 2026
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हरिद्वार – योग और आयुर्वेद को वर्षों से जन-आंदोलन का रूप देने वाले योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा पतंजलि में इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल का उद्घाटन किए जाने के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में नई बहस खड़ी हो गई है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब अतीत में एलोपैथिक चिकित्सा को लेकर बाबा रामदेव के बयान विवादों का कारण बनते रहे हैं।बाबा रामदेव आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के सबसे मुखर समर्थकों में रहे हैं और कई सार्वजनिक मंचों से एलोपैथी को लेकर तीखी टिप्पणियां कर चुके हैं। कोविड काल के दौरान उनके कुछ बयानों पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सहित डॉक्टर संगठनों ने कड़ा विरोध जताया था। हालांकि बाद में रामदेव की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि उनका उद्देश्य किसी चिकित्सा पद्धति का अपमान नहीं, बल्कि आयुर्वेद को बढ़ावा देना है।1769031797773इसी पृष्ठभूमि में इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल की शुरुआत को लेकर विरोधाभास की चर्चा तेज है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क दुर्घटना, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, गंभीर संक्रमण और अन्य आपात स्थितियों में आधुनिक चिकित्सा, प्रशिक्षित एलोपैथिक डॉक्टर और अत्याधुनिक उपकरण ही जीवन रक्षक साबित होते हैं। ऐसे मामलों में इलाज पूरी तरह मेडिकल प्रोटोकॉल और कानूनी मानकों के तहत ही किया जाता है।emergency critical care d8e396be8bपतंजलि योगपीठ में इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल के शुभारंभ के मौके पर बाबा रामदेव ने अपने बयान में कहा कि यह अस्पताल चिकित्सा विज्ञान में एक नया अध्याय है, जहां आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेद और योग का समन्वय किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर की स्थितियों में आधुनिक चिकित्सा पद्धति की भूमिका अहम है और आवश्यकता पड़ने पर उसी के अनुसार इलाज किया जाएगा। रामदेव ने अस्पताल को सेवा का केंद्र बताते हुए इसे व्यापारिक संस्था नहीं बताया।acharya balkrishna 1वहीं पतंजलि के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण ने चिकित्सा व्यवस्था को लेकर समन्वय का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की भूमिका इलाज में सीमित लेकिन महत्वपूर्ण है और यदि इसके साथ परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों को प्रभावी ढंग से जोड़ा जाए, तो आने वाले कुछ वर्षों में वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक संतुलित और सुलभ बनाया जा सकता है।आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर जैसी स्थितियों में आधुनिक मेडिकल साइंस को अपनाना अनिवार्य है, लेकिन लंबे समय से जटिल और असाध्य माने जाने वाले रोगों के उपचार में योग और आयुर्वेद को भी समाधान के रूप में स्वीकार किए जाने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि दोनों चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय से एक व्यापक और टिकाऊ स्वास्थ्य मॉडल विकसित किया जा सकता है।patrkaraवरिष्ठ पत्रकारों और स्वास्थ्य नीति से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह पहल किसी वैचारिक बदलाव से अधिक जमीनी हकीकत की स्वीकारोक्ति को दर्शाती है। उनका कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर चिकित्सा पद्धतियों को लेकर बहस अलग विषय है, लेकिन इमरजेंसी सेवाओं का संचालन तय मेडिकल गाइडलाइंस, लाइसेंसिंग नियमों और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा होता है।baba ramdev 1696861606इस अस्पताल को स्वामी रामदेव की स्वास्थ्य क्षेत्र में विस्तार की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। योग और आयुर्वेद के बाद अब इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर सुविधाओं का जुड़ना एक ऐसे मॉडल की ओर संकेत करता है, जहां अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियां अपनी उपयोगिता और सीमाओं के साथ काम करती दिखाई देती हैं।IMG 20251218 WA0067हालांकि सवाल अभी भी कायम है कि जिन एलोपैथिक तरीकों पर पहले सवाल उठाए गए, वही आज इमरजेंसी सेवाओं की रीढ़ क्यों बने। लेकिन यह भी उतना ही स्पष्ट है कि गंभीर संकट की घड़ी में विचारधारा नहीं, बल्कि त्वरित और वैज्ञानिक इलाज ही प्राथमिकता बन जाता है।

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