January 24, 2026
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हरिद्वार – जनपद हरिद्वार की दो विधानसभाओं और दो ग्राम पंचायतों की सीमा के बीच बहने वाला नाला वर्षों से आम जनता के लिए मुसीबत बना हुआ था। रोजाना इसी रास्ते से गुजरने वाले लोग जलभराव और कीचड़ में फंसते थे, सड़क हादसे आम बात हो चुकी थी और हालात ऐसे थे कि स्कूली बच्चों को कई बार यूनिफॉर्म पर कीचड़ लगने के बाद घर लौटना पड़ता था। बावजूद इसके, यह समस्या लंबे समय तक फाइलों और आश्वासनों में ही उलझी रही।

विधायकों तक पहुंची गुहार, लेकिन समाधान नदारदIMG 20260115 WA0018स्थानीय व्यापारी रवींद्र प्रजापति के मुताबिक उन्होंने ज्वालापुर विधायक रवि बहादुर और रानीपुर विधायक आदेश चौहान से कई बार मिलकर इस गंभीर समस्या से अवगत कराया। हर बार उम्मीद जगी, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने रहे। समस्या को लेकर अलग-अलग माध्यमों से जिम्मेदारों तक बात पहुंचाई गई, मगर सालों तक जनता को किसी ठोस राहत का इंतजार ही करना पड़ा।

मीडिया के जरिए डीएम तक पहुंचा मामलाIMG 8073दो दिन पहले यह मुद्दा मीडिया के माध्यम से जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के संज्ञान में लाया गया। मीडिया से बातचीत में डीएम ने साफ कहा था कि यह मामला आज ही उनके संज्ञान में आया है और इसे प्राथमिकता के आधार पर जल्द सुलझाया जाएगा। यह बयान केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके बाद प्रशासन की गति भी बदली हुई नजर आई।

पहले ही दिन मैदान में उतरा प्रशासनFB IMG 1768459424230समस्या सामने आते ही जिलाधिकारी ने बिना देरी किए खंड विकास अधिकारी को मौके पर भेजा। नाले की स्थिति, जलभराव के कारण और समाधान की संभावनाओं का मौके पर आकलन कराया गया। डीएम के निर्देश के बाद आज सफाई कर्मी नाले पर पहुंचे और नाले की सफाई का काम शुरू कराया गया, ताकि जलनिकासी सुचारू हो सके।

स्थायी समाधान की दिशा में अगला कदम20260115 111828प्रशासन का कहना है कि नाले की सफाई के बाद जलभराव की समस्या खत्म हो जाएगी। यदि इसके बावजूद कहीं दिक्कत सामने आती है, तो उसके लिए अलग से ठोस और दीर्घकालिक योजना तैयार की जाएगी। साफ है कि इस बार प्रशासन मामले को अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की दिशा में ले जाना चाहता है।

ढाई-तीन साल की परेशानी, दो दिन में राहत

जिस समस्या से करीब ढाई से तीन हजार लोग पिछले कई वर्षों से जूझ रहे थे, उसका समाधान जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने महज दो दिन में निकालकर दिखा दिया। अब स्कूली बच्चों को कीचड़ से सनी यूनिफॉर्म के साथ घर लौटने की मजबूरी नहीं झेलनी पड़ेगी, सड़क से गुजरने वाले करीब दो हजार लोगों को वैकल्पिक रास्तों की भटकन से राहत मिलेगी और जलभराव के कारण बंद पड़ी दुकानों में फिर से रौनक लौटने की उम्मीद जगी है।

सवाल बरकरार इतने सालों तक क्यों अनदेखी?IMG 20251218 WA0067हालांकि राहत की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन सवाल अब भी कायम है कि जिस समस्या का समाधान दो दिन में संभव था, वह सालों तक क्यों लटकी रही। जनता के लिए यह कार्रवाई उम्मीद की किरण है, वहीं व्यवस्था के लिए यह आईना भी कि संवेदनशीलता हो तो समाधान देर से नहीं आता।

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