रोजगारपरक योजनाओं से कोई भी प्रभावित न रहे वंचित : प्रशांत आर्य
होमस्टे, वाहन मद व ट्रेकिंग योजनाओं के 45 आवेदनों की हुई समीक्षा
धराली आपदा प्रभावितों के पुनर्वास और आजीविका सुदृढ़ीकरण की दिशा में जिला प्रशासन ने अहम कदम उठाया है। जिला सभागार में आयोजित चयन समिति की बैठक में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने आपदा प्रभावित क्षेत्र से प्राप्त सभी आवेदनों को बिना देरी के स्वीकृति प्रदान करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि रोजगारपरक योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचे।
बैठक में दीन दयाल उपाध्याय होमस्टे योजना, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना तथा ट्रेकिंग ट्रेक्शन सेंटर (टीटीसी) योजना के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि आपदा से प्रभावित परिवारों के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित करना प्रशासन की प्राथमिकता है, ताकि वे शीघ्र आत्मनिर्भर बन सकें।
होमस्टे योजना की समीक्षा के दौरान प्रशांत आर्य ने निर्देश दिए कि इको सेंसटिव जोन के मानकों का विशेष ध्यान रखा जाए तथा पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित होने वाले होमस्टे प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी समान रूप से आवश्यक है।
धराली क्षेत्र के निवासियों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए ‘वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना’ के अंतर्गत वाहन मद में प्राप्त सभी आवेदनों को समिति द्वारा तत्काल स्वीकृति प्रदान कर दी गई। जिलाधिकारी ने दोहराया कि आपदा प्रभावित किसी भी स्थिति में योजनाओं के लाभ से वंचित न रहें।
ट्रेकिंग ट्रेक्शन सेंटर योजना के अंतर्गत चार ट्रेकिंग सेंटरों से जुड़े 25 गांवों से प्राप्त आवेदनों की भी जांच की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी दस्तावेजों की विधिवत जांच कर नियमानुसार ऋण स्वीकृत करने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए।
बैठक में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के तहत वाहन मद में 8, गैर-वाहन मद में 1, दीन दयाल उपाध्याय होमस्टे योजना के अंतर्गत 10 तथा ट्रेकिंग ट्रेक्शन योजना के तहत कुल 45 आवेदनों की समीक्षा की गई।
बैठक में सीडीओ जय भारत सिंह, डीटीडीओ केके जोशी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
जिला प्रशासन की इस पहल से धराली क्षेत्र के आपदा प्रभावितों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है और स्वरोजगार के माध्यम से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना है।
