February 10, 2026
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चंपावत जिले की शैक्षिक पहचान और गौरवशाली विरासत के प्रतीक पंडित बेनीराम पुनेठा राजकीय इंटर कॉलेज, लोहाघाट में 59 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पहली बार ऐतिहासिक पुरातन छात्र मिलन समारोह का आयोजन होने जा रहा है। 11 फरवरी को आयोजित होने वाले इस एलुमनी मीट को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है, वहीं देश-विदेश में सेवाएं दे रहे पूर्व छात्रों में भी अपने पुराने परिसर से जुड़ने की गहरी भावना देखी जा रही है।

वर्ष 1947 में स्थापित इस प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान की नींव दानवीर पंडित बेनीराम पुनेठा और उनके परिवार के त्याग व दूरदर्शिता से पड़ी। उनके पुत्रों द्वारा उस समय 50 हजार रुपये की बड़ी धनराशि दान कर जूनियर हाई स्कूल की स्थापना कराई गई, जो आगे चलकर हाई स्कूल और फिर राजकीय इंटर कॉलेज के रूप में विकसित हुआ। विद्यालय की स्थापना हेतु पाटन गांव के पाटनी व पांडे परिवार तथा लोहाघाट के राय बंधुओं द्वारा 22 एकड़ भूमि दान की गई, जो आज भी इस संस्थान के इतिहास की अमूल्य धरोहर है।

वर्ष 1956 में इंटरमीडिएट का दर्जा प्राप्त करने के बाद यह विद्यालय शिक्षा का ऐसा केंद्र बना, जिसकी ख्याति लखनऊ, बनारस, प्रयागराज, फैजाबाद और अल्मोड़ा जैसे बड़े शैक्षिक नगरों तक पहुंची। प्रारंभिक दौर में पं. बेनी प्रसाद भट्ट जैसे विद्वान प्रधानाचार्य और बाद में आर.सी. तिवारी के नेतृत्व में विद्यालय ने शिक्षा, अनुशासन और गुणवत्ता के नए मानक स्थापित किए। यह तत्कालीन काली कुमाऊं तहसील का एकमात्र प्रमुख शिक्षण संस्थान था, जहां पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और नैनीताल तक से छात्र अध्ययन हेतु आते थे।

आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए पुनेठा परिवार द्वारा पंडित हरिनंदन पुनेठा छात्रवृत्ति योजना की शुरुआत की गई, जिससे सैकड़ों छात्रों का भविष्य संवर सका। इस विद्यालय की शैक्षिक परंपरा का विस्तार आज भी जीवंत है—यहीं से प्रेरित होकर 62 इंटर कॉलेज, दो सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज, लगभग डेढ़ दर्जन पब्लिक स्कूल, 43 राजकीय हाई स्कूल और चार मान्यता प्राप्त हाई स्कूल अस्तित्व में आए।
1957 में निर्मित विद्यालय का भव्य भवन अपने समय में पूरे उत्तर प्रदेश में एक उदाहरण माना जाता था।

परिसर में स्थापित दानवीर पंडित बेनीराम पुनेठा की प्रतिमा आज भी विद्यार्थियों को त्याग, सेवा और शिक्षा के मूल्यों की प्रेरणा देती है। आधुनिक दौर में भले ही शिक्षा के संसाधन बदले हों, लेकिन चंपावत जनपद के लिए यह विद्यालय आज भी शैक्षिक जन्मस्थली के रूप में सम्मानित है। कार्यक्रम संयोजक श्री चौबे ने इस विद्यालय से जुड़े सभी पूर्व छात्रों, शिक्षकों और शुभचिंतकों से 11 फरवरी को आयोजित इस ऐतिहासिक पुनर्मिलन समारोह में सहभागी बनने की अपील की है।

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