February 25, 2026
7e4983aa-2866-4809-af9f-d30179d37757.jpg

संजू पुरोहित संपादक

विकासखंड नारसन के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले एक महीने के भीतर पर्यावरण और सरकारी राजस्व को भारी क्षति पहुँचाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ रात के अंधेरे में वन माफियाओं ने मिलीभगत के चलते सैकड़ों फलदार और हरे-भरे पेड़ों को आरी से काट दिया है। स्थानीय स्तर पर हो रहे इस “पर्यावरण संहार” में उद्यान विभाग और वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है, क्योंकि घटना के इतने समय बाद भी विभाग के पास कटे हुए पेड़ों की सटीक संख्या और दोषियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।

मीडिया द्वारा इस गंभीर विषय पर पक्ष जानने की कोशिश की गई तो अधिकांश अधिकारी कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से बचते नजर आए, जो साफ़ तौर पर मामले में किसी बड़े ‘घोलमाल’ की ओर इशारा करता है। इस प्रकरण में जब जिला उद्यान अधिकारी तेजपाल सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कोई ठोस जानकारी देने के बजाय मामले को टालते हुए कहा कि वे पहले एडीओ नारसन प्रताप सिंह से वार्ता करेंगे, उसके बाद ही कुछ बता पाएंगे। बिना अनुमति और नियमों को ताक पर रखकर फलदार वृक्षों पर चलाई गई यह आरी जहाँ क्षेत्र के किसानों और पर्यावरण प्रेमियों में रोष पैदा कर रही है, वहीं धामी सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीतियों के बीच स्थानीय अधिकारियों की यह चुप्पी विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाती है।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *