February 13, 2026
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देहरादून – प्रदेश में लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं और राजधानी में हुई ताबड़तोड़ वारदातों के बाद आखिरकार शासन को बड़ा प्रशासनिक कदम उठाना पड़ा। गोलियों की तड़-तड़ाहट और कानून व्यवस्था पर उठते सवालों के बीच कई जनपदों की पुलिस कुर्सियां एक साथ हिला दी गईं, जिसे सरकार की डैमेज कंट्रोल कवायद माना जा रहा है।

राजधानी देहरादून में बढ़ते अपराधों ने पुलिस व्यवस्था पर सीधा दबाव बनाया, जिसके बाद बड़े स्तर पर फेरबदल करते हुए प्रमेंद्र सिंह डोभाल को नई जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं अब तक देहरादून की कमान संभाल रहे अजय सिंह को स्पेशल टास्क फोर्स की जिम्मेदारी देकर नई भूमिका में भेजा गया है। यह बदलाव साफ संकेत दे रहा है कि सरकार राजधानी की कानून व्यवस्था को लेकर किसी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है।इधर किसान सुखविंदर आत्महत्या प्रकरण के बाद लगातार चर्चाओं में रहे मणिकांत मिश्रा को मुख्यालय अटैच कर दिया गया। इस फैसले ने प्रशासनिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।क्या यह सिर्फ रूटीन तबादला है या फिर बढ़ते दबाव का असर?

उधम सिंह नगर जैसे संवेदनशील जिले में कानून व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी अजय गणपति कुंभार को दी गई है। वहीं हरिद्वार की कमान नवनीत भुल्लर को सौंपते हुए बागेश्वर जिले की जिम्मेदारी जितेंद्र मेहरा के हाथों में दी गई है। लगातार हो रहे बदलावों से साफ है कि शासन अब जिलों में नई रणनीति के साथ पुलिस व्यवस्था को रीसेट करने की कोशिश कर रहा है। IMG 20251218 WA0067हालांकि बड़ा सवाल अब भी कायम है,क्या सिर्फ कुर्सियां बदलने से अपराधों पर लगाम लगेगी, या फिर सरकार को जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई का मॉडल भी लागू करना होगा। फिलहाल तबादलों की यह श्रृंखला प्रदेश की कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का जवाब तो है, लेकिन असली परीक्षा अब मैदान में दिखेगी।

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