हरिद्वार। जनपद में अवैध दवा कारोबार के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई अब बड़ा असर दिखाने लगी है। वरिष्ठ औषधि निरीक्षक अनीता भारती की लगातार छापेमारी और मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई से जहां आम लोगों में राहत का माहौल है, वहीं अवैध दवा कारोबारियों में खलबली मची हुई है। अब चर्चाएं इस बात की तेज हो गई हैं कि दवा माफिया उन्हें हरिद्वार में देखना ही नहीं चाहते।कार्रवाई से टूटा अवैध कारोबार का नेटवर्क जब से अनीता भारती ने हरिद्वार में औषधि निरीक्षक का कार्यभार संभाला है, तब से विभागीय कार्रवाई की रफ्तार अचानक तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक अब तक करीब 40 से अधिक मामलों में एनडीपीएस और अवैध दवा बिक्री से जुड़े मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं। कई मेडिकल स्टोर और संदिग्ध सप्लाई चैन जांच के दायरे में आए, जिससे लंबे समय से चल रहे अवैध नेटवर्क पर सीधा असर पड़ा।
सोशल मीडिया पर शुरू हुआ नया दबाव पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनीता भारती को लेकर अचानक नकारात्मक पोस्ट और टिप्पणियां बढ़ने लगी हैं। अलग-अलग अकाउंट्स से उन्हें निशाना बनाए जाने को लेकर प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा है। जानकारों का मानना है कि यह दबाव उसी कार्रवाई का परिणाम है जिसने अवैध कारोबारियों की कमर तोड़ दी है।
‘सख्ती’ बनी असली वजह?
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा अब खुलकर होने लगी है कि लगातार हो रही छापेमारी और कानूनी कार्रवाई से परेशान दवा माफिया किसी भी तरह सख्त अधिकारी को हटवाने की कोशिश में जुटे हैं। क्योंकि पहली बार अवैध दवा बिक्री के खिलाफ कार्रवाई कागजों से निकलकर जमीन पर दिखाई दी है।
जनता का सवाल कार्रवाई रुकेगी या और तेज होगी?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सख्त कार्रवाई के चलते उठ रही आवाजें प्रशासनिक फैसलों को प्रभावित करेंगी या फिर अवैध दवा कारोबार के खिलाफ अभियान और तेज होगा। फिलहाल इतना तय है कि कार्रवाई ने उन लोगों की नींद जरूर उड़ा दी है, जो वर्षों से नियमों को ताक पर रखकर कारोबार चला रहे थे।
