मानर मल्ला खेतीखान की “वन तपस्विनी” बनीं प्रेरणा, डीएम मनीष कुमार ने किया सम्मानित।
जनपद के दूरस्थ ग्राम मानर मल्ला (खेतीखान) से एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि बदलाव के लिए उम्र नहीं, बल्कि जज़्बा मायने रखता है। 80 वर्षीय भागीरथी देवी ने अपने अटूट संकल्प और वर्षों की कठिन साधना से उजड़ चुके मानर के जंगल को फिर से जीवंत कर दिया। कभी अवैध कटान और उपेक्षा के कारण सूना पड़ चुका यह वन क्षेत्र आज फिर से हरियाली से आच्छादित है और इस परिवर्तन के पीछे एक महिला का अथक संघर्ष है। बिना किसी सरकारी सहायता के भागीरथी देवी ने अकेले ही पौधरोपण का बीड़ा उठाया और इसे अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। वर्षों तक लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने हजारों पौधे रोपे और उनकी देखरेख की।
रोज जंगल जाकर पौधों को पानी देना, उनकी सुरक्षा करना, जानवरों से बचाना—यह सब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। उनका यह समर्पण किसी तपस्या से कम नहीं है। कड़ी सर्दी, तेज धूप और बरसात हर मौसम में उन्होंने अपने संकल्प को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका जोश युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। आज उसी मेहनत का परिणाम है कि मानर का उजड़ा जंगल फिर से घने वन में बदल चुका है, जहां पेड़-पौधों के साथ पक्षियों और वन्यजीवों की चहल-पहल भी लौट आई है। उनके इस अद्वितीय योगदान को सम्मानित करते हुए जिलाधिकारी मनीष कुमार ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और उनके कार्यों की सराहना की। डीएम ने कहा कि भागीरथी देवी ने यह साबित किया है कि एक व्यक्ति भी अपने प्रयासों से बड़ा बदलाव ला सकता है।
उनका कार्य न केवल पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि समाज में जागरूकता और जनभागीदारी की मिसाल भी है। उन्होंने बताया कि इन वृक्षों से आने वाले समय में पर्यावरण संतुलन मजबूत होगा, जल स्रोतों को संजीवनी मिलेगी, भू-क्षरण रुकेगा और क्षेत्र को स्वच्छ वायु प्राप्त होगी। जिलाधिकारी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे भागीरथी देवी से प्रेरणा लेकर वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाएं और प्रकृति संरक्षण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। इस अवसर पर विभिन्न जिला स्तरीय अधिकारी एवं स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे।
