हरिद्वार। धर्म और आस्था की नगरी हरिद्वार में इस बार होली केवल रंगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक बदलाव और राजनीतिक संदेश का मंच बनती दिखाई दी। तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह ने साफ संकेत दे दिया कि हरिद्वार अब केवल परंपराओं की बात नहीं करेगा, बल्कि नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की दिशा में कदम बढ़ाने को तैयार है। कार्यक्रम में जली होली की अग्नि को प्रतीक बनाते हुए हरिद्वार को नशा मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लिया गया, जिसने पूरे आयोजन को सामान्य धार्मिक कार्यक्रम से कहीं आगे खड़ा कर दिया।
धर्मनगरी की पहचान कभी गंगा, घाट और मंदिरों से होती थी, लेकिन पिछले दो दशकों में लगातार बढ़ते स्मैक, शराब और सट्टे के कारोबार ने शहर की छवि पर सवाल खड़े किए हैं। इसी पृष्ठभूमि में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहितों, स्थानीय नागरिकों और युवाओं की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि अब हरिद्वार की दिशा बदलने की मांग जमीन से उठ रही है। मंच से बार-बार यह बात दोहराई गई कि धर्म की राजधानी को नशे की राजधानी बनने से रोकना अब समाज की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के आयोजक उज्ज्वल पंडित ने भले ही इसे सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन बताया, लेकिन समारोह में पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा, वरिष्ठ भाजपा नेता सुनील सैनी, विशाल गर्ग सहित कई राजनीतिक चेहरों की मौजूदगी ने इस आयोजन को राजनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण बना दिया। जानकार मानते हैं कि यह आयोजन आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले जनभावनाओं को समझने और नई भूमिका तय करने का संकेत भी है।
सूत्रों की मानें तो हरिद्वार की जनता लंबे समय से विकास और नशे पर नियंत्रण को लेकर ठोस नेतृत्व की तलाश में है। पिछले वर्षों में शहर के सीमित क्षेत्रों तक विकास सिमटने और युवाओं के नशे की गिरफ्त में आने की चर्चा लगातार होती रही है। ऐसे माहौल में उज्ज्वल पंडित का नशा मुक्त हरिद्वार का संकल्प सीधे जनता के मुद्दों को छूता दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यह होली मिलन समारोह केवल सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि हरिद्वार विधानसभा की राजनीति में नए चेहरे के प्रवेश का संकेत है। तीर्थ पुरोहित समाज के समर्थन और स्थानीय लोगों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए यह माना जा रहा है कि आने वाले समय में उज्ज्वल पंडित हरिद्वार विधानसभा सीट से मजबूत दावेदार के रूप में सामने आ सकते हैं।
धर्म की इस नगरी में उठी होली की यह जोत अब केवल परंपरा की आग नहीं, बल्कि बदलाव की चिंगारी बनती नजर आ रही है और सवाल यही है कि क्या इस चिंगारी से हरिद्वार सच में नशा मुक्त भविष्य की ओर बढ़ेगा।
