भारत आर्थिक विकास और तकनीक के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ने के दावे कर रहा है, लेकिन बच्चों में कुपोषण की समस्या आज भी गंभीर चुनौती बनी हुई है। केरलम के अलप्पुझा जिले में दो साल के मासूम की कथित भुखमरी और कुपोषण से मौत ने सरकारी योजनाओं और खाद्य सुरक्षा के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 में भारत की 122 देशों में 100वीं रैंक और 9.8 प्रतिशत आबादी के कुपोषित होने का आंकड़ा भी चिंता बढ़ाता है। आखिर योजनाओं के बावजूद गरीब परिवारों तक मदद क्यों नहीं पहुंच रही? जब मासूम भूख से जूझ रहा था, तो व्यवस्था की नजर उस परिवार पर क्यों नहीं पड़ी? यह घटना सिर्फ एक बच्चे की मौत नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की जवाबदेही और सामाजिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल है।
