उत्तराखंड के चंपावत जिले के पाटी विकासखंड स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, उपकेंद्र मनटांडे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। वीडियो में स्वास्थ्य केंद्र के बरामदे में डिस्पोजल गिलास, गुटखे के पैकेट, टिन के गमले में पानी और परिसर के एक कोने में दवाएं जलाए जाने के दृश्य दिखाई दिए थे। मामले का जिलाधिकारी मनीष कुमार ने तत्काल संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जांच के निर्देश दिए।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। जांच में सामने आया कि वीडियो में दिखाई गई दवाएं आयरन की गोलियां थीं, जिनकी उपयोग अवधि दिसंबर 2024 में समाप्त हो चुकी थी। हालांकि, जांच टीम ने दवाओं को निस्तारित करने के तरीके को अनुचित माना और स्पष्ट किया कि एक्सपायर दवाओं का निस्तारण निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए।
वहीं, स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लगा होने को लेकर एएनएम ने बताया कि वीडियो बनाए जाने के समय वह गांव में एक मरीज को देखने गई थीं। स्थानीय महिलाओं ने भी गर्भवती और प्रसूता महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाएं मिलने तथा बच्चों के नियमित टीकाकरण की जानकारी दी। फार्मासिस्ट के अनुसार, स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी में पिछले ढाई वर्षों के दौरान सभी प्रसव संस्थागत होने की बात सामने आई है।
हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रहे डिस्पोजल गिलास, गुटखे के पैकेट और टिन के गमले में पानी को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल यह है कि ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में साफ-सफाई और व्यवस्थाओं की निगरानी किस तरह की जा रही है? अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग एक्सपायर दवाओं के निस्तारण की प्रक्रिया के साथ-साथ केंद्र की साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए क्या कदम उठाता है।
