हरिद्वार स्थित मां मनसा देवी रोप-वे के संचालन और रखरखाव को लेकर चल रहे विवाद पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव आनंद वर्धन को मामले के समाधान के लिए एक विशेष कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने कहा है कि कमेटी टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से तीन महीने के भीतर पूरे विवाद का समाधान निकाले।
दरअसल, हरिद्वार नगर निगम की ओर से मनसा देवी रोप-वे के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दूसरी कंपनियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है। इस प्रक्रिया को लेकर दामोदर रोपवे इंफ्रा लिमिटेड और उषा ब्रेको लिमिटेड समेत अन्य पक्षों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान उषा ब्रेको कंपनी की ओर से कहा गया कि वह वर्ष 1981 से मनसा देवी रोप-वे का संचालन और रखरखाव करती आ रही है। कंपनी ने सवाल उठाया कि रोप-वे संचालन का पर्याप्त अनुभव नहीं रखने वाली कंपनियों को इसकी जिम्मेदारी कैसे दी जा सकती है।
वहीं, हाईकोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं का निस्तारण करते हुए मुख्य सचिव को विशेष कमेटी बनाने और तीन महीने के भीतर पूरी प्रक्रिया का समाधान करने के निर्देश दिए हैं। अब इस फैसले के बाद रोप-वे संचालन की जिम्मेदारी किस कंपनी को मिलेगी, यह कमेटी की प्रक्रिया के बाद तय होगा। खास बात यह है कि मां मनसा देवी मंदिर में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में रोप-वे का सुरक्षित और सुचारु संचालन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिहाज से भी काफी अहम है।
