हरिद्वार- हरिद्वार नगर निगम शहर को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। जिस निगम के कंधों पर पूरे शहर की सफाई और व्यवस्था की जिम्मेदारी है, वही निगम अपने ही कार्यालय के सामने की मुख्य सड़क को साफ कराने में असमर्थ नजर आया। हालात ऐसे बने कि महीनों पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद जब अतिक्रमण नहीं हटा, तो जिलाधिकारी मयूर दीक्षित को खुद सुबह सड़क पर उतरकर कार्रवाई करनी पड़ी।बताया जा रहा है कि जिस अतिक्रमण को हटाने के लिए जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग और नगर निगम को कई महीने पहले स्पष्ट निर्देश दिए थे, उस पर न तो नगर निगम ने गंभीरता दिखाई और न ही संबंधित विभाग हरकत में आया। नतीजा यह रहा कि प्रशासनिक आदेश फाइलों में दबे रहे और अतिक्रमण मौके पर जस का तस बना रहा।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जब जिलाधिकारी खुद नगर निगम क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई कराने पहुंचे, तब भी नगर निगम आयुक्त नंदन कुमार समय पर मौके पर नहीं पहुंचे। यह स्थिति साफ तौर पर नगर निगम की कार्यशैली और जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को हरिद्वार नगर निगम का पलीता ।
एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार स्वच्छ भारत अभियान को लेकर देशभर में संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हरिद्वार नगर निगम की हालत इसके ठीक उलट नजर आ रही है। जिस निगम को पूरे शहर की सफाई सुनिश्चित करनी है, वह अपने कार्यालय और आसपास की सड़क तक साफ नहीं रख पा रहा।
सीएम धामी के उत्तराखंड अतिक्रमण मुक्त अभियान को पिछड़ने में लगा नगर निगम।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “अतिक्रमण मुक्त उत्तराखंड” अभियान को भी हरिद्वार नगर निगम की लापरवाही से पलीता लगता दिख रहा है। नगर निगम क्षेत्र में फैले अतिक्रमण को हटाने के आदेश महीनों पहले दिए जा चुके थे, लेकिन निगम की टीम ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।अंततः प्रशासनिक सख्ती तब दिखी, जब डीएम मयूर दीक्षित को खुद मैदान में उतरकर अतिक्रमण के खिलाफ मोर्चा संभालना पड़ा। यह तस्वीर साफ बता रही है कि हरिद्वार में व्यवस्था चलाने की जिम्मेदारी जिन पर है, वही जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या नगर निगम सिर्फ आदेशों का इंतजार करता रहेगा, या फिर जिम्मेदारी निभाने के लिए उसे हर बार जिलाधिकारी को सड़क पर उतरना पड़ेगा?
