February 9, 2026
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विद्युत विभाग में अंधेरे के बीच पनपता खेल, 33 हजार केवी की लाइन बनी सवालों का केंद्र।

राजधानी – कहावत है दीया तले अंधेरा, और यह कहावत अगर किसी विभाग पर बिल्कुल सटीक बैठती है तो वह है विद्युत विभाग। जो विभाग पूरे शहर, गांव और बाजारों को रोशनी देता है, वही विभाग खुद सवालों की रोशनी से अब तक बचता रहा है। आम जनता की नजर में बिजली विभाग का मतलब सिर्फ मीटर रीडिंग, बिल वसूली और राजस्व जमा करना भर है, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा गहरी और चौंकाने वाली बताई जा रही है।

33 हजार केवी की लाइन, दो तस्वीरें एक रोशनी, दूसरी झूला।

सूत्रों के अनुसार विभाग में तैनात कुछ अधिकारी और कर्मचारी 33 हजार किलोवॉट की एक हाईटेंशन लाइन से तो बड़े क्षेत्र को निर्बाध बिजली आपूर्ति दे रहे हैं, लेकिन दूसरी समान क्षमता की लाइन को अभी तक धरातल पर नहीं लाया गया है कथित तौर पर इस लाइन को “झूले” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

अगर पर्दा उठा तो झटका 11 हजार केवी जैसा।

up electricity news IMG 20260129 WA0049विभागीय सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि यदि बिजली विभाग के भीतर चल रहे इस खेल पर गंभीरता से रोशनी डाली जाए, तो सच्चाई का झटका आम लोगों को 11 हजार केवी की लाइन जैसा महसूस हो सकता है। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े तकनीकी और वित्तीय मामलों पर अब तक न तो कोई सार्वजनिक जवाबदेही तय हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई।

कुंभ 2027 से पहले तैयारी, लाइनों के ‘झूले’ फिर चर्चा मेंIMG 20260129 WA0046सूत्र बताते हैं कि आगामी कुंभ मेला 2027 को देखते हुए विभागीय गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। लेकिन चर्चा यह नहीं कि बिजली व्यवस्था कितनी मजबूत होगी, बल्कि यह कि कुंभ के नाम पर कितनी नई लाइनों के “झूले” तैयार किए जाएंगे। सवाल यह भी है कि क्या कुंभ की आड़ में फिर वही पुरानी कार्यशैली दोहराई जाएगी?

शिकायत पत्र पहुंचा उच्च स्तर तक, कार्रवाई का इंतजारIMG 20260129 WA0043

बताया जा रहा है कि विद्युत विभाग के एक अधिकारी के खिलाफ शिकायत पत्र स्थानक स्तर तक पहुंच चुका है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि उस शिकायत को बढ़ावे में कुछ सक्षम रहे।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो विभाग पूरे शहर को रोशन करने की जिम्मेदारी निभा रहा है, वही विभाग खुद पारदर्शिता और जवाबदेही के अंधेरे में क्यों खड़ा है? अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या सिस्टम पर जमी यह धूल साफ होगी, या फिर “झूला” यूं ही झूलता रहेगा।

नोट – समाचार से जुड़े अधिकारी इस ख़बर को पढ़ कर। अंतिम शर्म ना समझे।

आपने कुछ गलत नहीं पढ़ा अंतिम शर्म ही लिखा है लेकिन आप अंतिम शर्म को सही पढ़ने में सक्षम हो।

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