राजधानी – उत्तराखंड के सरकारी विभागों में अफसरों की पहचान अलग-अलग होती है। कोई अपनी सख़्ती के लिए जाना जाता है, कोई तेज़ फैसलों के लिए। लेकिन उत्तराखंड को रोशन करने वाले विभाग में एक ऐसे अधिकारी की चर्चा इन दिनों ज़ोरों पर है, जिनकी पहचान उनकी पावर से बन रही है। चर्चा यह नहीं कि वह कितनी फाइलें निपटाते हैं, चर्चा यह है कि उनके सामने सिस्टम कैसे झुक जाता है। कहते हैं बिजली 33000 वोल्ट की हो तो झटका ज़रूर देती है, लेकिन इस अफसर की पावर उससे भी ऊपर बताई जा रही है। हालात यहां तक पहुंच गए कि एक जनपद से राजधानी भेजने का आदेश सार्वजनिक हो चुका था, लेकिन अगले ही दिन उसी आदेश को बदल दिया गया। हालांकि यह मामला तो सालों पुराना है लेकिन अब नए मामले ने चर्चा तेज कर दी है । यह कहना भी गलत नहीं होगा कि या तो तबादले से पहले होमवर्क नहीं हुआ, या फिर अफसर इतना सक्षम है कि आदेश भी टिक नहीं पाते।
नई कहानी तहरीर पहुंची, लेकिन कार्रवाई नहीं,
इस पावरफुल अधिकारी की नई कहानी सामने आई है सूत्रों के अनुसार इस अधिकारी से जुड़ी एक तहरीर कोतवाली तक भी पहुंची है। आम मामलों में तहरीर के बाद पूछताछ होती है, बयान दर्ज होते हैं, लेकिन यहां कहानी अलग है। बताया जा रहा है कि जब पूछताछ की बात आई, तो अधिकारी की जगह कोई और व्यक्ति सामने आ गया जो पूरा मामला संभालने में सक्षम बताया गया। फिलहाल इस पूरे मामले को संभालने एक नौजवान सक्षम रहा। अब सवाल यह नहीं कि अधिकारी दोषी हैं या नहीं। सवाल यह है कि क्या रोशनी वाले विभाग में कुछ लोग इतने सक्षम हो चुके हैं कि उनके सामने नियम, आदेश और प्रक्रिया सब बेअसर हो जाएं?
कहानी अभी बाकी है…कहानी का अगला अध्याय थाने से शुरू होगा। कौन सक्षम था, किसने क्या संभाला और क्यों कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी इस पर परतें अभी खुलनी बाकी हैं।
