September 11, 2026
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सनातन मूल्यों, अनुशासन और एकाग्रता पर दिया जोर, बोले—युवा सही दिशा में बढ़ें तो हर लक्ष्य संभव

गुरुकुलम एकेडमी में आध्यात्मिक और शैक्षिक वातावरण के बीच एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अद्वैत आश्रम मायावती के विद्वान संत एवं ‘प्रबुद्ध भारत’ पत्रिका के संपादक स्वामी दिव्याकृपानंद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विद्यालय पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। विद्यार्थियों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका अभिनंदन किया, जिससे पूरा परिसर उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा से भर उठा।

कार्यक्रम का संचालन शशांक पाण्डे ने किया। अपने ओजस्वी उद्बोधन में स्वामी दिव्याकृपानंद ने विद्यार्थियों को सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों और भारतीय संस्कृति की विशेषताओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की एक श्रेष्ठ पद्धति है, जो सत्य, सेवा, करुणा, अनुशासन और आत्मविकास का संदेश देता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को धर्म का वास्तविक अर्थ समझाते हुए कहा कि अपने कर्तव्यों का पालन करना, माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करना तथा समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना ही सच्चा धर्म है।
स्वामी जी ने एकाग्रता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया जैसे आकर्षण विद्यार्थियों का ध्यान भटकाते हैं। उन्होंने छात्रों को नियमित अध्ययन, योग, ध्यान और समय के सदुपयोग की आदत अपनाने की सलाह दी।

इस दौरान उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर युवा के भीतर असीम शक्ति छिपी होती है, जिसे सही दिशा और आत्मविश्वास के साथ निखारा जा सकता है।
विद्यालय के प्रबंधक राजेश पाण्डेय ने कहा कि ऐसे संतों का सान्निध्य विद्यार्थियों के जीवन निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं कोऑर्डिनेटर कविता पुनेठा ने कहा कि स्वामी जी के विचार विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे।

कार्यक्रम में रियाज़ अहमद, महेंद्र जोशी, चंद्र भानु, अंकित देव, नेहा दत्ता, अमित तिवारी, मनमोहन गहतोड़ी, दीपा कोठारी, जीवन जोशी सहित विद्यालय परिवार के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं और कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ, जहां विद्यार्थियों ने शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और अनुशासन को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

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