सीएम धामी की पहल और डीएम मनीष कुमार की मॉनिटरिंग से बदली मेले की तस्वीर, अब 365 दिन मेले की तैयारी।
उत्तर भारत के प्रसिद्ध पूर्णागिरि मेला को राष्ट्रीय स्वरूप देने की दिशा में इस बार प्रशासनिक व्यवस्थाओं ने नई मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर मेले को केवल तीन माह तक सीमित न रखकर पूरे वर्ष संचालित करने की तैयारी शुरू हो चुकी है, वहीं जिलाधिकारी मनीष कुमार की कार्यशैली और सख्त मॉनिटरिंग ने इस बार मेले को श्रद्धालुओं के लिए यादगार बना दिया है।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने शुरुआत से ही स्पष्ट कर दिया था कि पूर्णागिरि आने वाले श्रद्धालु सिर्फ यात्री नहीं, बल्कि “मेहमान” हैं और उन्हें बेहतर सुविधाएं व शुद्ध माहौल मिलना चाहिए। यही वजह रही कि इस बार मेले में पहुंचे लाखों श्रद्धालु व्यवस्थाओं से बेहद संतुष्ट नजर आए और अपने साथ अच्छी यादें लेकर लौट रहे हैं। प्रशासन की कोशिश है कि यहां आने वाला हर श्रद्धालु अगले वर्ष अपने साथ और अधिक लोगों को लेकर आए, यानी श्रद्धालु ही मेले के “ब्रांड एंबेसडर” बनें। इस वर्ष गत वर्षों की तुलना में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु मां मां पूर्णागिरि मंदिर के दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं, जबकि मेले की शेष अवधि में भीड़ और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
मेले से पहले जिलाधिकारी द्वारा पूरे क्षेत्र का दौरा कर दिए गए दिशा-निर्देशों का असर साफ दिखाई दे रहा है। अब तक मेले में कोई बड़ी सड़क दुर्घटना नहीं हुई, पूरे मेला क्षेत्र में बेहतर विद्युत प्रकाश व्यवस्था रही और साफ-सफाई व्यवस्था ने श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया। ठूलीगाड़ में रैन बसेरा और एक ही स्थान पर भंडारे की व्यवस्था किए जाने से भीड़ नियंत्रण और संचालन दोनों आसान हुए हैं। भैरव मंदिर से ऊपर करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र में दोनों ओर धर्मशालाओं की व्यवस्था तथा आने-जाने के रास्ते अलग किए जाने से श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिली है। रायबरेली से आए श्रद्धालु कृष्ण कुमार ने कहा कि “10 साल बाद मां का बुलावा आया है, लेकिन इस बार की व्यवस्थाओं ने मन खुश कर दिया।”
भीड़ अधिक होने पर रात 8 बजे के बाद भैरव मंदिर क्षेत्र से वाहनों की आवाजाही रोककर पैदल यात्रा को सुगम बनाया गया। मेले में पर्याप्त शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया गया, जबकि कूड़ा निस्तारण के लिए नए तरीके से कंपैक्टर के जरिए अपशिष्ट हटाया जा रहा है। खास बात यह रही कि इस बार जंगलों में आग लगने या बड़ी दुर्घटनाओं जैसी घटनाएं भी सामने नहीं आईं। प्रशासन ने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए अतिरिक्त अधिकारियों की ड्यूटी लगाई और रोज ऑनलाइन मॉनिटरिंग की गई। इसका असर यह रहा कि सभी विभाग एकजुट होकर काम करते नजर आए। मेले में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों के सौम्य व्यवहार की भी श्रद्धालु जमकर सराहना कर रहे हैं। सबसे बड़ी उपलब्धि जल पुलिस की रही, जिसने अब तक दर्जनों डूबते श्रद्धालुओं की जान बचाकर उन्हें नया जीवन दिया है।
“फीडबैक मॉडल” से और बेहतर होगा पूर्णागिरि मेला।
टनकपुर। मेला मजिस्ट्रेट डॉ. ललित मोहन तिवारी लगातार दिनभर श्रद्धालुओं के बीच पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। वह श्रद्धालुओं से सीधे संवाद कर फीडबैक भी ले रहे हैं, ताकि आने वाले समय में मेले को और व्यवस्थित बनाया जा सके। प्रशासन मानता है कि यह फीडबैक मॉडल भविष्य में पूरे वर्ष मेला संचालन की योजना में बेहद उपयोगी साबित होगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो वर्ष 2027 से पूर्णागिरि मेला 365 दिन संचालित किए जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है।
