हरिद्वार। सुमन नगर क्षेत्र में लगातार जलभराव ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई कॉलोनियों और रिहायशी इलाकों में पानी घरों तक पहुंच गया है, जिससे लोगों का बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। जलभराव ने सिर्फ जल निकासी व्यवस्था की पोल नहीं खोली, बल्कि अवैध कॉलोनियों के विकास से लेकर बिजली कनेक्शन और विभागीय निगरानी तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जलभराव के बाद डीएम तक पहुंची शिकायत
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सुमन नगर में लंबे समय से जल निकासी की समस्या बनी हुई है। हालात बिगड़ने के बाद स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई थी। इसके बावजूद जलभराव से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत नहीं मिलने से नाराजगी बढ़ रही है। सवाल यह है कि बारिश आने से पहले नालियों और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त क्यों नहीं की गई?
HRDA की निगरानी पर सबसे बड़ा सवाल
सुमन नगर में विकसित हो रही कॉलोनियों को लेकर हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण यानी HRDA की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों के मुताबिक क्षेत्र में कई कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं, लेकिन उनके नक्शे स्वीकृत होने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्राधिकरण की ओर से पूर्व में कुछ कॉलोनियों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई भी की गई थी, फिर भी निर्माण गतिविधियां पूरी तरह रुकती नजर नहीं आईं।
यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कॉलोनियों के नक्शे स्वीकृत नहीं थे तो जमीन पर निर्माण और प्लॉटिंग का सिलसिला कैसे चलता रहा? विभाग की निगरानी व्यवस्था इतने बड़े स्तर पर हो रहे विकास को समय रहते क्यों नहीं रोक सकी?
बिजली विभाग भी सवालों के घेरे में
मामला केवल कॉलोनियों की वैधता तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ऐसी कॉलोनियों में बिजली के ट्रांसफार्मर भी स्थापित कर दिए गए। यदि किसी कॉलोनी के विकास के लिए जरूरी स्वीकृतियां और एनओसी नहीं थीं, तो वहां विद्युत व्यवस्था उपलब्ध कराने की प्रक्रिया किस आधार पर पूरी हुई, यह भी जांच का विषय है।
जलभराव के लिए आखिर जिम्मेदार कौन?
सुमन नगर की मौजूदा स्थिति में नगर निकाय, विकास प्राधिकरण, सिंचाई और जल निकासी से जुड़े विभागों के साथ बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। अनियोजित निर्माण के बीच प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते बाधित हुए हैं या नहीं, इसकी जांच जरूरी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के समय पानी घरों में भरने के बाद विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में काम करें।
अब जरूरत केवल पानी निकालने की नहीं, बल्कि यह तय करने की है कि बिना पर्याप्त प्लानिंग और विभागीय स्वीकृतियों के रिहायशी कॉलोनियां कैसे विकसित हुईं और वहां मूलभूत सुविधाएं किस प्रक्रिया के तहत पहुंचीं। स्थानीय लोग पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार विभागों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
