कालरात्रि-की-आराधना-हवन-और-विशाल-भंडारे-के-साथ.jpg

*🌺माँ कालरात्रि की आराधना, हवन और विशाल भंडारे के साथ परमार्थ विद्या मन्दिर, चन्द्रेश्वर नगर में गूँजी शक्ति, साधना और सेवा की दिव्य त्रिवेणी*

*🌺नवरात्रि के सप्तम दिवस पर परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने की माँ कालरात्रि की विशेष पूजा-अर्चना एवं हवन*

*🌼भंडारे के माध्यम से दिया सेवा, समर्पण और लोकमंगल का संदेश*

ऋषिकेश, 17 अक्टूबर। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर परमार्थ विद्या मन्दिर, चन्द्रेश्वर नगर में भक्ति, शक्ति, साधना और सेवा का दिव्य संगम हुआ। नवरात्रि के सप्तम दिवस पर नवदुर्गा के सातवें स्वरूप, माँ कालरात्रि की विधिवत पूजा-अर्चना एवं हवन किया गया।

परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में माँ भगवती की आराधना के साथ भंडारा किया। इस अवसर पर आध्यात्मिक चेतना, श्रद्धा और लोककल्याण की भावना के साथ सनातन संस्कृति के उस शाश्वत संदेश को अभिव्यक्ति हुई, जिसमें उपासना का विस्तार सेवा और करुणा तक होता है।कालरात्रि की आराधना हवन और विशाल भंडारे के साथ

माँ कालरात्रि नवदुर्गा का वह दिव्य स्वरूप हैं, जो भय, अज्ञान, नकारात्मकता और आसुरी प्रवृत्तियों के विनाश का प्रतीक है। उनका स्वरूप हमें स्मरण कराता है कि जीवन के गहनतम अंधकार में भी दिव्य शक्ति का प्रकाश मार्ग प्रशस्त कर सकता है। माँ कालरात्रि की उपासना निर्भयता, आत्मबल, धैर्य और आंतरिक जागरण का संदेश देती है। उनकी कृपा से साधक अपने भीतर की दुर्बलताओं का सामना करने, विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और सत्य के मार्ग पर दृढ़ता से आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त करता है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने माँ भगवती की आराधना एवं हवन के माध्यम से विश्व शांति, मानवता के कल्याण, प्रकृति संरक्षण और समस्त सृष्टि के मंगल की भावना को प्रबल करने का संदेश दिया। हवन भारतीय सनातन परंपरा में शुद्धि, समर्पण और शुभ संकल्पों की आहुति का प्रतीक है। अग्नि में समर्पित प्रत्येक आहुति हमें स्मरण कराती है कि जीवन में अहंकार, द्वेष, ईर्ष्या और नकारात्मकता का त्याग कर प्रेम, सद्भाव, करुणा और सेवा को अपनाना ही सच्ची आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है।1792251996 851 माँ कालरात्रि की आराधना हवन और विशाल भंडारे के साथ 1792251996 848 माँ कालरात्रि की आराधना हवन और विशाल भंडारे के साथ

पूज्य स्वामी जी ने माँ कालरात्रि की आराधना के मर्म को जीवन में निर्भयता, सकारात्मकता और आत्मविश्वास के संचार से जोड़ते हुए यह प्रेरणा दी कि आध्यात्मिक शक्ति का वास्तविक स्वरूप हमारे विचारों, व्यवहार और कर्मों में प्रकट होना चाहिए। जब हम अपने भीतर के भय पर विजय प्राप्त करते हैं, तब उन चुनौतियों का सामना अधिक साहस और विवेक से कर पाते हैं। जब हमारे भीतर करुणा जागृत होती है, तब हम दूसरों के दुःखों को समझ पाते हैं; और जब सेवा का भाव जागृत होता है, तब जीवन स्वयं लोकमंगल का माध्यम बन जाता है।

इस पावन अवसर पर आयोजित भंडारा के माध्यम से पूज्य स्वामी जी ने संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति की अतिथि-सत्कार, अन्नदान और समभाव की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है। भोजन कराना केवल शरीर की आवश्यकता पूरी करना नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और आत्मीयता के साथ मानवता की सेवा करना है। भंडारे की परंपरा समाज को यह संदेश देती है कि सेवा में भेदभाव का स्थान नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के प्रति सम्मान और संवेदना का भाव होना चाहिए।1792251996 471 माँ कालरात्रि की आराधना हवन और विशाल भंडारे के साथ 1792251996 786 माँ कालरात्रि की आराधना हवन और विशाल भंडारे के साथ

परमार्थ निकेतन की आध्यात्मिक परंपरा में पूजा, प्रार्थना, साधना और सेवा एक-दूसरे के पूरक हैं। यहाँ पर्व और उत्सव आध्यात्मिक चेतना को सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने की प्रेरणा देते हैं। नवरात्रि का प्रत्येक दिवस शक्ति के एक विशिष्ट स्वरूप का स्मरण कराता है और हमें अपने भीतर सद्गुणों का विकास करने के लिए प्रेरित करता है। माँ कालरात्रि का दिवस विशेष रूप से यह संदेश देता है कि भय और निराशा के अंधकार को साहस, श्रद्धा और सकारात्मक कर्मों से दूर किया जा सकता है।1792251996 536 माँ कालरात्रि की आराधना हवन और विशाल भंडारे के साथ

इस अवसर पर श्री राजीव जैन जी, श्री मती नीना जैन जी, श्री सुभाष छेत्री जी, श्री मती उपासना जी, परमार्थ विद्यया मंदिर के सभी शिक्षक -शिक्षिकायें, परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमार, आचार्य की गरिमामयी उपस्थिति रही.


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *