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​हरिद्वार( सुरेन्द्र बोकाडिया) ।आर्यनगर ज्वालापुर स्थित पातंजल योगधाम में 12 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक ध्यान योग शिविर का भव्य आयोजन किया गया। इस शिविर में देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंचे साधकों ने महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि) का सैद्धांतिक और क्रियात्मक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

​शिविर के अध्यक्ष स्वामी मेधानंद सरस्वती ने बताया कि आज के समय में समाज में कई तरह के योग चल रहे हैं, लेकिन यह सबसे प्राचीन योग है जो महर्षि पतंजलि के योग शास्त्र पर आधारित है। उन्होंने पांच प्रमाणिक योगियों—महर्षि पतंजलि, महर्षि व्यास, भगवान कृष्ण, आदिगुरु शंकराचार्य और महर्षि दयानंद—के सिद्धांतों को योग का आधार बताया।

​स्वामी मेधानंद जी ने आधुनिक जीवन के तनाव और मशीनी जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज मनुष्य मोबाइल और मशीनों की गति से जी रहा है, जिसके गंभीर दुष्प्रभाव उसके स्वास्थ्य और परिवार पर पड़ रहे हैं। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य लोगों को महर्षि दयानंद और वेदों की ओर वापस लाना है, ताकि वे अपनी संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं को बचा सकें। शिविर में लगभग 100 साधकों ने भाग लिया, जिनमें से कई लोगों को शुगर, ब्लड प्रेशर, थायराइड और हाइपरटेंशन जैसी शारीरिक समस्याओं में भी बड़ा आराम मिला है।

​साधकों ने साझा किए अपने अनुभव

​शिविर में शामिल हुए महाराष्ट्र (बॉम्बे) से स्टेट बैंक के सेवानिवृत्त प्रमुख मुख्य प्रबंधक और अन्य वरिष्ठ साधकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने जीवन में पहली बार शास्त्रों के अनुकूल और अष्टांग योग पर आधारित ऐसा शुद्ध और प्रमाणिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। शिविर के दौरान योग के सैद्धांतिक और क्रियात्मक दोनों पक्षों का गहराई से अभ्यास कराया गया, जिससे साधकों को मानसिक और शारीरिक रूप से अभूतपूर्व शांति और लाभ प्राप्त हुआ।

स्वामी मेधानंद जी महाराज पातंजल योगधाम, आर्यनगर, ज्वालापुर के अध्यक्ष, जिनके मार्गदर्शन में इस ध्यान योग शिविर का आयोजन किया गया।

प्रेस वार्ता में वेदव्रत सैनी – कोषाध्यक्ष, अनिल कुमार गुप्ता, रामेश्वर लाल एवं त्रिलोक वत्स जनसम्पर्क अधिकारी आदि उपस्थित रहे।


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