October 5, 2026
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14वें उपराष्ट्रपति, भारत श्री जगदीप धनखड़ जी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुदेश धनखड़ जी ने परमार्थ गंगा आरती में किया सहभाग

💥पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में माँ गंगा की आरती एवं विश्वशांति के लिए की प्रार्थना

ऋषिकेश, 5 अक्टूबर। परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के पावन गंगा तट पर आज भारत के 14वें उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ जी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुदेश धनखड़ जी ने परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी तथा पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में माँ गंगा की दिव्य आरती में सहभाग किया। इस अवसर पर विश्वशांति, मानवता के कल्याण, राष्ट्र की समृद्धि एवं सभी के सुखमय जीवन के लिए प्रार्थना की गई।14वें उपराष्ट्रपति भारत श्री जगदीप धनखड़ जी एवं उनकी धर्मपत्नी

परमार्थ निकेतन की विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती प्रतिदिन माँ गंगा के पावन तट पर प्रार्थना, श्रद्धा और समर्पण के साथ आयोजित होती है। आज की आरती में विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने इस आध्यात्मिक अवसर को और भी विशेष बना दिया। वैदिक मंत्रोच्चार, भजन, दीपों की दिव्य ज्योति और माँ गंगा की आरती से पूरा गंगा तट भक्तिमय हो उठा।

इस अवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत की संस्कृति सबको स्वीकार करने की संस्कृति है। भारतीय संस्कृति ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ की संस्कृति है, अर्थात् चारों दिशाओं से कल्याणकारी विचार हमारे जीवन में आएँ। यह संस्कृति केवल अपने लिए जीने की नहीं, बल्कि ‘जियो और जीने दो’ की संस्कृति है। हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना के साथ सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का संदेश देती है। आज आवश्यकता है कि हम अपनी संस्कृति के इन जीवन-मूल्यों को अपने आचरण में उतारें और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएँ।1791211877 111 14वें उपराष्ट्रपति भारत श्री जगदीप धनखड़ जी एवं उनकी धर्मपत्नी

भारत के 14वें उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ जी ने परमार्थ निकेतन में अपने आध्यात्मिक अनुभव को साझा करते हुए कहा कि पूज्य स्वामी जी का सान्निध्य व्यक्ति के भीतर गुरुतत्त्व की भावना को जागृत करता है। उन्होंने कहा कि परमार्थ निकेतन में बिताए कुछ क्षणों ने ही उन्हें गहन आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की। उन्होंने बताया कि वे अपने कक्ष में पूज्य स्वामी जी का सद्साहित्य पढ़ रहे थे, जिसमें भारतीय संस्कृति का सम्पूर्ण सार समाहित है।1791211877 562 14वें उपराष्ट्रपति भारत श्री जगदीप धनखड़ जी एवं उनकी धर्मपत्नी 1791211877 858 14वें उपराष्ट्रपति भारत श्री जगदीप धनखड़ जी एवं उनकी धर्मपत्नी

श्री धनखड़ जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें ज्ञान प्रदान करती है और यह ज्ञान सदैव हमारे चित्त में रहना चाहिए। हमारे वेद, पुराण और उपनिषद् ज्ञान के भंडार हैं। आज सम्पूर्ण मानव समाज किसी न किसी रूप में अनेक चुनौतियों और समस्याओं से जूझ रहा है। इन समस्याओं का समाधान भारतीय संस्कृति के जीवन-मूल्यों में निहित है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा सरल नहीं है; इसमें अनेक कठिनाइयाँ आती हैं, परन्तु हमारा लक्ष्य अर्जुन की तरह स्पष्ट और एकाग्र होना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने स्वामी विवेकानन्द जी का भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि आज भारत के युवा आध्यात्मिकता की ओर आगे बढ़ रहे हैं, जो भारत के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। भारत गौरव और नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है।1791211877 558 14वें उपराष्ट्रपति भारत श्री जगदीप धनखड़ जी एवं उनकी धर्मपत्नी 1791211877 119 14वें उपराष्ट्रपति भारत श्री जगदीप धनखड़ जी एवं उनकी धर्मपत्नी 1791211877 612 14वें उपराष्ट्रपति भारत श्री जगदीप धनखड़ जी एवं उनकी धर्मपत्नी 1791211877 405 14वें उपराष्ट्रपति भारत श्री जगदीप धनखड़ जी एवं उनकी धर्मपत्नी 1791211877 857 14वें उपराष्ट्रपति भारत श्री जगदीप धनखड़ जी एवं उनकी धर्मपत्नी
श्री धनखड़ जी ने कहा कि परमार्थ निकेतन सभी का ‘हिमालयन होम’ है। उन्होंने सभी के सुखद, स्वस्थ एवं मंगलमय जीवन की कामना की।
पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि आज माँ गंगा की गोद में, इस दिव्य गंगा आरती के अवसर पर श्री जगदीप धनखड़ जी एवं श्रीमती सुदेश धनखड़ जी की उपस्थिति अत्यंत भावपूर्ण और सौभाग्य का क्षण है। माँ गंगा आरती हमें स्मरण कराती है कि भारत की आध्यात्मिक परम्परा केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति प्रेम, सेवा, करुणा और समर्पण की जीवनशैली है। आज जब हम माँ गंगा के चरणों में विश्वशांति की प्रार्थना करते हैं, तो हमारा संकल्प हो कि हम अपने जीवन में भारतीय संस्कृति के मूल्यों को धारण करें और माँ गंगा तथा प्रकृति की निर्मलता और गरिमा को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखें।1791211877 52 14वें उपराष्ट्रपति भारत श्री जगदीप धनखड़ जी एवं उनकी धर्मपत्नी
पूज्य स्वामी जी व डा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने श्री जगदीप धनखड़ जी व श्रीमती सुदेश धनखड़ जी का रूद्राक्ष का पौधा और अंगवस्त्र भेंट कर उनका अभिनन्दन किया।


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