राजधानी और धर्मनगरी में पुलिस और एसटीएफ आए दिन मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी कर नशीली टैबलेट और इंजेक्शनों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं। हरिद्वार जिले में तैनात ड्रग इंस्पेक्टर पर कार्यभार इतना अधिक है कि जिला कार्यालय से लेकर राज्य कार्यालय तक फाइलों का काम संभालने के कारण मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी के लिए समय नहीं है। पूर्व में तैनात ड्रग इंस्पेक्टर जिले में मेडिकल स्टोरों पर कार्रवाई करने की जगह अपने सोशल मीडिया पर रील बनाने के लिए पहुंचती थीं। वर्तमान में तैनात ड्रग इंस्पेक्टर भी जनपद कार्यालय की जगह राजधानी स्थित कार्यालय में सेवाएं दे रही हैं। सेवाओं में इतने व्यस्त अधिकारी के पास न तो फोन उठाने का वक्त है और न ही मेडिकल स्टोरों के निरीक्षण का। क्या ड्रग्स विभाग की अनदेखी हरिद्वार को नशे की ओर धकेल रही है? यह सवाल हम नहीं, बल्कि पिछले कई महीनों से जनपद में ड्रग्स विभाग की ओर से किसी बड़ी कार्रवाई की जानकारी सामने न आने से उठ रहे हैं। या यूं कहें कि ड्रग इंस्पेक्टर फार्मा कंपनियों के कामकाज में ही उलझकर रह गई हैं। यदि विभाग ने कोई कार्रवाई की है, तो उसे मीडिया के साथ साझा क्यों नहीं किया गया?

पूर्व में तैनात ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती लगभग छह साल तक जिले में तैनात रहीं। मजे की बात यह है कि जिन मेडिकल स्टोरों पर मैडम कार्रवाई करने पहुंचती थीं, उन्हीं मेडिकल स्टोरों पर पुलिस ने छापेमारी कर नशीले इंजेक्शनों के मामले में कार्रवाई की। आखिरकार, मैडम और पुलिस के आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर सामने आया कि मैडम ने लगभग 43 एनडीपीएस मुकदमे दर्ज किए, जबकि पुलिस ने लगभग 1300 एनडीपीएस मुकदमों में कार्रवाई करते हुए आरोपियों को जेल भेजा हैं।

