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डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन से भावपूर्ण श्रद्धाजंलि
💥वैश्विक हाथ धुलाई दिवस पर परमार्थ निकेतन से स्वच्छ हाथ, स्वस्थ जीवन और विकसित भारत का संकल्प
आइए, साबुन से हाथ धोने की आदत अपनाएँ, बीमारियों को दूर भगाएँ और स्वस्थ, सुरक्षित एवं स्वच्छ समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएँ
💦हाथ धोने के हीरो बनें, स्वस्थ जीवन के सूत्रधार बनें! ऋषिकेश, 15 अक्टूबर 2026। भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक, दूरदर्शी विचारक एवं ‘मिसाइल मैन’ डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की जयंती के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन की ओर से उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनका प्रेरणादायी जीवन, ज्ञान के प्रति समर्पण, सादगी, राष्ट्रसेवा और युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करने वाला व्यक्तित्व सदैव भारत की चेतना में जीवंत रहेगा।
वैश्विक हाथ धुलाई दिवस के अवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने ‘स्वच्छ हाथ, स्वस्थ जीवन’ का संदेश देते हुए परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों को सही तरीके से साबुन से हाथ धोने के लिए प्रेरित किया तथा साबुन वितरित किए। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि हाथों की स्वच्छता अनेक बीमारियों और संक्रमणों से बचाव का सरल एवं प्रभावी उपाय है। आइए, स्वच्छता को अपनी दिनचर्या बनाएँ और स्वयं स्वस्थ रहकर एक स्वच्छ, सुरक्षित एवं स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान दें।एपीजे अब्दुल कलाम जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि डॉ. कलाम जी का जीवन इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि ज्ञान जब विनम्रता से जुड़ता है, विज्ञान जब मानवता की सेवा में समर्पित होता है और सपने जब संकल्प बनते हैं, तब राष्ट्र के भविष्य को नई दिशा मिलती है। उन्होंने अपना जीवन भारत को सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित बनाने के संकल्प को समर्पित किया। उनका विश्वास था कि देश की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा पीढ़ी है। युवाओं के सपनों, उनकी प्रतिभा और उनके चरित्र में ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव निहित है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि डॉ. कलाम जी के विचार आज भी प्रत्येक विद्यार्थी, युवा, शिक्षक, वैज्ञानिक और नागरिक को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करते हैं।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब विज्ञान के साथ संस्कार, प्रगति के साथ प्रकृति और उपलब्धियों के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी जुड़ेगा। हमें ऐसे भारत का निर्माण करना है, जहाँ प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले, प्रत्येक नागरिक को सम्मान मिले और प्रत्येक व्यक्ति स्वस्थ, स्वच्छ एवं सुरक्षित जीवन जी सके।1792056291 515 डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन
आज वैश्विक हाथ धुलाई दिवस हाथों की स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संक्रमण तथा अनेक बीमारियों से बचाव के प्रभावी उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि स्वच्छता केवल व्यक्तिगत आदत नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और स्वस्थ जीवन का आधार है। हम अपने घरों, विद्यालयों, अस्पतालों, कार्यालयों, रसोईघरों और सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता का ध्यान रखकर स्वयं के साथ-साथ दूसरों के स्वास्थ्य की रक्षा भी कर सकते हैं। कई बार जीवन में बड़े परिवर्तन लाने के लिए किसी बड़े संसाधन की आवश्यकता नहीं होती; एक छोटी-सी अच्छी आदत भी व्यापक सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन सकती है।
उन्होंने कहा कि भोजन करने से पहले, शौचालय के उपयोग के बाद, भोजन बनाने से पहले और खाँसने या छींकने के बाद उचित समय पर साबुन से हाथ धोना संक्रमण के प्रसार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बच्चों में बचपन से ही हाथ धोने की आदत विकसित करना आवश्यक है, क्योंकि स्वस्थ आदतें ही स्वस्थ समाज की नींव बनती हैं। विद्यालयों, अस्पतालों और सामुदायिक संस्थानों में स्वच्छ जल, साबुन और हाथ धोने की सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने सभी से आह्वान किया कि आइए, हम हाथ धुलाई के हीरो बनें! अपने परिवार, मित्रों, बच्चों और समुदाय को हाथों की स्वच्छता के प्रति जागरूक करें। स्वच्छता का संदेश केवल अपने तक सीमित न रखें, बल्कि इसे जन-जन तक पहुँचाएँ। स्वच्छ हाथ अनेक बीमारियों से बचाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और एक जागरूक व्यक्ति पूरे समुदाय में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।1792056291 223 डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन 1792056291 515 डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन 1792056291 94 डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन
परमार्थ निकेतन सदैव आध्यात्मिक चेतना के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और मानव कल्याण के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। आइए, डॉ. कलाम जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर सेवा और राष्ट्रप्रेम को अपने जीवन का आधार बनाएँ तथा स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाएँ।


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