भाजपा के नेता और अधिकारी हुए निकम्मे! जनसमस्याओं के समाधान के लिए हरिद्वार में अब VIP ग्रुप ही सहारा?
हरिद्वार। केंद्र और उत्तराखंड दोनों जगह भाजपा की सरकार है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार अधिकारियों को जनता की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के निर्देश देते रहे हैं। आम जनता की शिकायतों के निस्तारण के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, जनता दरबार, तहसील दिवस, जनसुनवाई कार्यक्रम और विभागीय शिकायत पोर्टल जैसे कई माध्यम पहले से संचालित हैं।इसके बावजूद हरिद्वार में संचालित एक चर्चित VIP व्हाट्सएप ग्रुप को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ग्रुप से जुड़े लोगों का दावा है कि जिले के कई अधिकारी इस मंच पर मौजूद हैं और यहां उठाई गई समस्याओं का तत्काल संज्ञान लेकर समाधान कराया जाता है।यहीं से बड़ा सवाल खड़ा होता है। जब जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने अलग-अलग स्तर पर आधिकारिक व्यवस्था बनाई हुई है, तो फिर अधिकारियों की मौजूदगी किसी निजी सोशल मीडिया ग्रुप में क्यों आवश्यक हो जाती है? यदि वास्तव में समस्याओं का समाधान VIP ग्रुप के माध्यम से अधिक तेजी से हो रहा है तो क्या यह सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल नहीं खड़ा करता?
हरिद्वार में अक्सर यह चर्चा सुनने को मिलती है कि किसी विभाग तक पहुंचने से पहले VIP ग्रुप में समस्या डालना ज्यादा प्रभावी माना जाता है। यदि यह धारणा सही है तो फिर CM हेल्पलाइन, जनता दरबार, तहसील दिवस और अन्य शिकायत निवारण मंचों की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि अधिकारियों को अपनी जवाबदेही केवल अधिकृत सरकारी माध्यमों के प्रति रखनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का तर्क है कि सोशल मीडिया ग्रुप केवल सूचना के आदान-प्रदान का मंच हैं और इन्हें सरकारी तंत्र का विकल्प नहीं माना जा सकता।फिलहाल चर्चा का विषय यही है कि जब सरकार ने शिकायतों और जनसमस्याओं के समाधान के लिए इतने मंच उपलब्ध कराए हैं, तब भी हरिद्वार में VIP ग्रुप की उपयोगिता और उसमें अधिकारियों की सक्रिय मौजूदगी आखिर क्यों बनी हुई है।
अब यह सवाल जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है कि क्या सरकारी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं या फिर VIP ग्रुप ने प्रशासन और जनता के बीच एक समानांतर संवाद मंच का रूप ले लिया है।
