October 5, 2026
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उत्तराखंड की दिव्य धरती पर शिक्षा के साथ विद्या और संस्कृति के साथ प्रकृति का संदेश
✨परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी ने श्रीमती मंजीरा देवी इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों को दिया जीवन निर्माण का संदेश
🌺उत्तराखंड, स्वयं प्रकृति की एक खुली पाठशाला
स्वामी चिदानन्द सरस्वती
उत्तरकाशी, 4 अक्टूबर। देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती हिमालय की ऊँची चोटियों, कल-कल बहती नदियों और हरे-भरे वनों की धरती के साथ यह ऋषियों की तपोभूमि, संस्कारों की भूमि और जीवन को प्रकृति के साथ जीना सिखाने वाली संस्कृति की भूमि है। इसी दिव्य वातावरण में परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी ने उत्तरकाशी स्थित श्रीमती मंजीरा देवी इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें शिक्षा के साथ विद्या, आधुनिकता के साथ आध्यात्मिकता, संस्कृति के साथ संस्कार तथा विकास के साथ विरासत व प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।की दिव्य धरती पर शिक्षा के साथ विद्या और 1791115813 334 उत्तराखंड की दिव्य धरती पर शिक्षा के साथ विद्या और 1791115813 7 उत्तराखंड की दिव्य धरती पर शिक्षा के साथ विद्या और
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि शिक्षा तब पूर्ण होती है जब वह हमारे जीवन में संस्कार, संवेदना, सेवा और सद्भाव बनकर उतरती है। विद्यालय हमें ज्ञान देता है, परन्तु विद्या हमें यह सिखाती है कि उस ज्ञान का उपयोग किस प्रकार स्वयं के, समाज के और सम्पूर्ण प्रकृति के कल्याण के लिए किया जाए।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के बच्चों के पास एक अद्भुत सौभाग्य है। उनके चारों ओर स्वयं प्रकृति एक खुली पाठशाला की तरह विद्यमान है। हिमालय उन्हें अडिग रहने की प्रेरणा देता है, गंगा उन्हें निरंतर बहते रहने और सबको जीवन देने का संदेश देती है, वृक्ष उन्हें देने की संस्कृति सिखाते हैं और यहाँ की ऋषि परम्परा उन्हें आत्मचिंतन, साधना और सेवा का मार्ग दिखाती है।
पूज्य स्वामी जी ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में कितनी भी ऊँची उपलब्धियाँ प्राप्त हों, लेकिन यदि हमारे भीतर करुणा नहीं, प्रकृति के प्रति संवेदना नहीं और अपने माता-पिता, गुरुजनों तथा समाज के प्रति सम्मान नहीं, तो वह सफलता अधूरी है।
उन्होंने बच्चों को प्रकृति के साथ अपने संबंध को और गहरा करने का आह्वान करते हुए कहा कि “प्रकृति हमारी संपत्ति नहीं, हमारी माता है।” हिमालय, नदियाँ, जंगल, जल और मिट्टी केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि हमारे जीवन का आधार हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करने, जल का संरक्षण करने, वृक्ष लगाने और अपने विद्यालय तथा आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज दुनिया को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो ज्ञानवान होने के साथ संस्कारवान, आधुनिक होने के साथ जड़ों से जुड़े हुए और सफल होने के साथ संवेदनशील हों। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की युवा पीढ़ी पूरे विश्व के सामने यह उदाहरण प्रस्तुत कर सकती है कि आधुनिक विकास और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।1791115813 561 उत्तराखंड की दिव्य धरती पर शिक्षा के साथ विद्या और 1791115813 344 उत्तराखंड की दिव्य धरती पर शिक्षा के साथ विद्या और 1791115813 699 उत्तराखंड की दिव्य धरती पर शिक्षा के साथ विद्या और
डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है, अपने भीतर की आवाज को सुनना और अपने जीवन को एक सुंदर उद्देश्य देना। उन्होंने कहा कि शिक्षा हमें अनेक अवसर देती है, लेकिन संस्कार हमें सही दिशा देते हैं। उन्होंने बच्चों को अपने माता-पिता, गुरुजनों और अपनी संस्कृति के प्रति कृतज्ञ रहने का संदेश दिया।
साध्वी जी ने कहा कि आज का युवा डिजिटल दुनिया से जुड़ा हुआ है और उसके पास ज्ञान के अनेक स्रोत उपलब्ध हैं, लेकिन वास्तविक ज्ञान केवल सूचना एकत्र करने से नहीं आता। ज्ञान तब विद्या बनता है जब वह हमारे व्यवहार में प्रेम, धैर्य, अनुशासन और करुणा बनकर प्रकट हो।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने पूज्य स्वामी जी एवं साध्वी जी के साथ संवाद किया तथा शिक्षा, आध्यात्मिकता, प्रकृति, पर्यावरण और जीवन-मूल्यों से जुड़े विषयों पर प्रेरणादायी विचार प्राप्त किए। बच्चों के बीच उत्साह, जिज्ञासा और आत्मीयता का वातावरण रहा।


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