देश में महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर राजनीतिक दलों के दावों पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी ADR की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 187 मौजूदा सांसदों और विधायकों ने अपने चुनावी हलफनामों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामले घोषित किए हैं। इनमें 19 सांसद और 168 विधायक शामिल हैं। सबसे गंभीर बात ये है कि 14 जनप्रतिनिधियों ने दुष्कर्म से जुड़े मामले भी घोषित किए हैं, जिनमें दो सांसद और 12 विधायक हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक दलों में भाजपा के सबसे ज्यादा 106 जनप्रतिनिधियों ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामले घोषित किए हैं। इसके बाद कांग्रेस के 20 और तेलुगु देशम पार्टी के 18 जनप्रतिनिधि हैं। वहीं, राज्यवार आंकड़ों में पश्चिम बंगाल 69 जनप्रतिनिधियों के साथ पहले स्थान पर है। आंध्र प्रदेश में 22 और ओडिशा में 17 जनप्रतिनिधियों ने ऐसे मामले घोषित किए हैं।
ADR और नेशनल इलेक्शन वॉच ने 4,881 मौजूदा सांसदों और विधायकों के चुनावी हलफनामों का विश्लेषण कर ये रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2024 में देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 4 लाख 41 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए गए।
इन आंकड़ों ने राजनीतिक दलों की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया और महिला सुरक्षा को लेकर उनकी प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, रिपोर्ट में दर्ज मामले चुनावी हलफनामों पर आधारित हैं और किसी के खिलाफ मामला दर्ज होने का मतलब दोषी साबित होना नहीं है। अब सवाल ये है कि महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े वादे करने वाले राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के चयन में कितनी जवाबदेही दिखाएंगे?
