हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण यानी HRDA में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कार्रवाई का मामला अब प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आम जनता के निर्माण कार्यों और नक्शों पर कार्रवाई करने वाला HRDA अपने ही विभाग के अधिकारियों से जुड़ी शिकायतों पर जवाब देने से क्यों बच रहा है? मामला तत्कालीन मुख्य अभियंता हरिश्चंद्र सिंह राणा के खिलाफ दर्ज शिकायत से जुड़ा है, जिसमें पद का दुरुपयोग करने, कथित भ्रष्टाचार और परिवार के लोगों को लाभ पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद उसे जांच के नाम पर लगातार गुमराह किया गया और संबंधित फाइल को दबाने की कोशिश की गई। अब RTI से मिले दस्तावेजों ने HRDA की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों में अधिकारियों की टिप्पणियां और फाइल आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तो दिखाई दे रही है, लेकिन जांच का नतीजा और कार्रवाई का विवरण सामने नहीं आया है। आखिर महीनों तक फाइल अधिकारियों की मेज पर घूमती रही, लेकिन कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या HRDA में शिकायतों का निस्तारण सिर्फ कागजों तक सीमित है? क्या अपने विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में प्राधिकरण के हाथ बंध जाते हैं? जनता को नियमों का पाठ पढ़ाने वाले HRDA के अधिकारी खुद जवाबदेही से कब तक बचते रहेंगे? अब मांग उठ रही है कि शासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और फाइलों में हुई देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करे। सवाल साफ है।
HRDA में शिकायतों पर कार्रवाई होती है या फिर फाइलों को दबाकर जिम्मेदार लोगों को बचाने का खेल चलता रहेगा?

