September 30, 2026
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प्रवेश राय

हरिद्वार जिले में जून महीने के आखिर में तत्कालीन खनन अधिकारी का यूकेडी नेता से नोकझोंक का वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें मुख्यालय से अटैच कर दिया गया था। इसके बाद जिले में अवैध खनन और खनन माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए नए जिला खनन अधिकारी के रूप में अमित गौरव की तैनाती की गई।लेकिन नई तैनाती को लगभग 3 महीने बीतने के बाद भी जिले में अवैध खनन, अवैध भंडारण और खनन माफियाओं की गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई नजर क्यों नहीं आ रही है? आखिर ऐसा कौन सा याराना है कि खनन विभाग के मुख्यालय से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर ही अवैध खनन के स्टॉक खुलेआम दिखाई दे रहे हैं? सड़क किनारे सरकारी जमीन से लेकर बरसाती नदियों तक अवैध खनन और भंडारण का खेल चलने के आरोप लग रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार की घोषित जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद अगर जिले में अवैध खनन और अवैध भंडारण पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है? खनन माफियाओं पर कार्रवाई के लिए तैनात किए गए अधिकारी की कार्यशैली ही अब सवालों के घेरे में है। क्या विभागीय अधिकारी इन अवैध स्टॉकों से अनजान हैं या फिर शिकायतों और खुलेआम चल रहे कारोबार के बावजूद जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं? ऐसे अधिकारियों की कार्यशैली का खामियाजा आखिरकार सरकार और विभाग को ही भुगतना पड़ सकता है। अवैध खनन का मुद्दा विपक्ष के लिए राजनीतिक हथियार बनता है और सड़क से लेकर विधानसभा तक सरकार से जवाब मांगा जाता है।

 

अब सवाल सीधा है अगर खनन माफियाओं पर कार्रवाई के लिए अधिकारी तैनात किए गए हैं, तो लगभग तीन महीने बाद भी अवैध खनन और भंडारण पर इतनी बड़ी लापरवाही क्यों? क्या जिला खनन अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं या फिर माफियाओं को खुली छूट मिली हुई है?

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