April 30, 2026
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जनपद में मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के तहत पलायन प्रभावित गांवों में आजीविका सृजन और आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से योजना की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जा सके। परियोजना निदेशक डीआरडीए के एन तिवारी ने बताया कि वर्ष 2020-21 से संचालित योजना के अंतर्गत राज्य पलायन निवारण आयोग ने जिले के आठ विकासखंडों के 78 राजस्व ग्रामों को चिन्हित किया है।

इन गांवों में विशेष विकास कार्य कराए जा रहे हैं। योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराकर पलायन की प्रवृत्ति को कम करना है। उन्होंने बताया कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए पॉलीहाउस और मशरूम उत्पादन, बकरी और मुर्गी पालन, डेयरी विकास, आजीविका केंद्र स्थापना, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, सौर लाइट, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, खेल मैदान निर्माण, पुस्तकालय स्थापना, ईको पार्क, जैविक खेती, सब्जी क्लस्टर विकास और जड़ी-बूटी संवर्धन जैसे कार्य किए जा रहे हैं।

इसके अलावा विद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष निर्माण, पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ीकरण और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन प्रतिबद्ध है और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से पलायन रोकने में मदद मिल रही है। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्य गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विभागों की 19 योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।



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