हरिद्वार। बढ़ते जल संकट और लगातार गिरते भूजल स्तर के बीच बीएचईएल हरिद्वार ने वर्षा जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए रेनवॉटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया है। नगर प्रशासन की ओर से संचालित इस पहल का उद्देश्य बारिश के पानी को संरक्षित कर भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना और भविष्य में जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
बीएचईएल परिसर में वर्षा जल के संग्रहण और पुनर्भरण के लिए विभिन्न स्थानों पर विशेष संरचनाएं विकसित की गई हैं। इसके तहत रिचार्ज पिट्स और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं के माध्यम से वर्षा के पानी को जमीन में पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। इससे न केवल पानी की बर्बादी रुकेगी, बल्कि भूजल स्तर में सुधार की भी उम्मीद है।
नगर प्रशासन का मानना है कि तेजी से बढ़ती आबादी और बदलते मौसम के कारण जल संरक्षण अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। ऐसे में संस्थागत स्तर पर उठाए जा रहे कदम भविष्य की जल जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बीएचईएल की यह पहल औद्योगिक इकाइयों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण मानी जा रही है।
बीएचईएल के अभियंता मयंक मौर्या ने बताया कि संस्थान लंबे समय से जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। वर्षा जल संचयन प्रणाली को और सुदृढ़ बनाकर प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था से न केवल बीएचईएल परिसर बल्कि आसपास के क्षेत्रों को भी लंबे समय तक सकारात्मक लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह सरकारी और निजी संस्थान वर्षा जल संचयन को प्राथमिकता दें तो भविष्य में जल संकट की चुनौती को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बीएचईएल हरिद्वार की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखी जा रही है।
