April 30, 2026
3f6f5ad2-2dad-4891-9298-1bc963021866.jpg

विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की ओर से ‘संतुलित उर्वरक उपयोग पर गहन अभियान’ के तहत ताकुला विकासखंड के पाटिया गांव में किसान गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ खेती के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने की जानकारी दी गई। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के निर्देशन में आयोजित गोष्ठी में 21 किसानों ने प्रतिभाग किया, जिनमें छह महिलाएं और 15 पुरुष किसान शामिल रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग को रोकना और किसानों को वैज्ञानिक खाद प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था। तकनीकी सत्र में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. कृष्ण कांत मिश्रा ने कहा कि संतुलित उर्वरक उपयोग खेती की लागत कम करने के साथ भूमि की उत्पादन क्षमता बनाए रखने में भी सहायक है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रकाश चंद घासल ने बताया कि उर्वरकों के अनियंत्रित प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन में गिरावट और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

वैज्ञानिकों ने किसानों को एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की सलाह दी। इस दौरान नैनो यूरिया के उपयोग, स्थानीय संसाधनों के पुनर्चक्रण, दलहनी फसलों के समावेश और वर्मीकम्पोस्ट निर्माण की जानकारी दी गई। किसानों को गोबर की खाद को सुरक्षित तरीके से संरक्षित करने और फसल अवशेषों को जैविक खाद में बदलने के उपाय भी बताए गए। गोष्ठी में वन्यजीवों से फसलों को होने वाले नुकसान पर भी चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने किसानों को हल्दी और अदरक जैसी नकदी फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे बंदरों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। समापन सत्र में किसानों से मृदा स्वास्थ्य कार्ड की संस्तुतियों के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने संस्थान की ओर से सुझाई गई तकनीकों और सुरक्षित फसल विकल्पों को अपनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर देवेंद्र सिंह कार्की और वर्षा कार्की भी मौजूद रहे।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *