हरिद्वार – हरिद्वार उपजिलाधिकारी (SDM) जितेंद्र कुमार के सख्त लेकिन संवेदनशील फैसले ने उन ‘राजा बाबुओं’ को भी झुका दिया है जो अब तक अपने ही मां-बाप के सम्मान को ठुकरा चुके थे। माता-पिता के भरण-पोषण संबंधी मामलों में लगातार मिल रही शिकायतों पर निर्णायक रुख अपनाते हुए SDM कोर्ट ने कई मामलों में बेटों को घर और संपत्ति से बेदखल करने के आदेश दिए। नतीजा जिन बच्चों ने अपने बुजुर्ग मां-बाप से मुंह मोड़ लिया था, वही अब वापस उनकी सेवा में लौट आए हैं।
उपजिलाधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि बीते महीनों से ऐसे कई प्रकरण कोर्ट में लंबित थे जिनमें वृद्ध माता-पिता ने अपने बेटों पर अपमान, उपेक्षा और भरण-पोषण न करने का आरोप लगाया था। प्रशासनिक सख्ती और कानूनी आदेशों के बाद अब हालात बदलने लगे हैं। कोर्ट में हुए निर्णयों के अनुसार जो संतान अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करेगी, उसे घर और संपत्ति दोनों से हाथ धोना पड़ेगा।
इन फैसलों के बाद हरिद्वार में कई परिवारों में फिर से अपनापन लौट आया है। बुजुर्गों ने SDM के इस कदम की खुलकर सराहना की है। उनका कहना है कि इस कार्यवाही ने उन बच्चों को भी सचेत किया है जो अपने माता-पिता को बोझ समझने लगे थे। अब कई बेटे अपनी गलती मानते हुए माता-पिता की सेवा में जुट गए हैं।
स्थानीय बुजुर्ग समाजसेवियों का कहना है कि SDM जितेंद्र कुमार का यह फैसला सामाजिक चेतना का प्रतीक है। इसने यह संदेश दिया है कि कानून भी उन मां-बाप के साथ खड़ा है जिन्होंने अपने बच्चों के लिए जिंदगी खपाई।हरिद्वार में यह फैसला प्रशासनिक सख्ती और मानवीय संवेदना दोनों का उदाहरण बन गया है। कहा जा सकता है, जिन बच्चों ने मां-बाप का सम्मान भुला दिया था, अब वही उनके चरणों में लौट आए हैं।
