हरिद्वार – जिस नगर निगम को शहर को साफ़, सभ्य और अनुशासित बनाने की जिम्मेदारी दी गई है, उसी निगम के नाम से अब शहर की दीवारों पर खुलेआम आपत्तिजनक और अभद्र भाषा लिखी दिखाई दे रही है। कूड़ा न डालने की चेतावनी के नाम पर दीवार पर उकेरे गए शब्द “कुत्ते की औलाद” ने नगर निगम हरिद्वार की कार्यशैली, सोच और नियंत्रण व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
स्वच्छता अभियान के बड़े-बड़े दावे करने वाला नगर निगम यह स्पष्ट करने में असफल नजर आ रहा है कि क्या अब जनता को नियमों का पालन कराने के लिए कानून की जगह गाली और अपमान का सहारा लिया जाएगा? सवाल सीधा है क्या किसी सरकारी संस्था को यह अधिकार है कि वह सार्वजनिक स्थान पर नागरिकों के लिए इस तरह की भाषा इस्तेमाल करे?
नगर निगम के नाम से दीवार पर लिखे गए इस संदेश में 500 रुपये जुर्माने की चेतावनी भी दर्ज है, लेकिन उससे कहीं बड़ा सवाल उस भाषा को लेकर है जो बच्चों, महिलाओं और आम लोगों के सामने खुलेआम प्रदर्शित की गई है। यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संवैधानिक मर्यादा और शालीनता पर सीधा हमला माना जा रहा है।
इस पूरे मामले को लेकर जब नगर निगम आयुक्त नंदन कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनसे बात नहीं हो सकी। ऐसे में अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि स्वच्छता जागरूकता के नाम पर दीवार पर लिखा गया यह आपत्तिजनक संदेश नगर निगम की टीम द्वारा अधिकृत रूप से लिखा गया है या किसी शरारती तत्व की करतूत है।यदि यह किसी शरारती तत्व द्वारा लिखा गया है, तो सवाल उठता है कि नगर निगम अब तक उस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया? और यदि यह नगर निगम की ही किसी टीम का काम है, तो फिर जिम्मेदारी किस अधिकारी की तय होगी और आयुक्त कार्यालय इस पर क्या कदम उठाएगा?
शहर में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है कि यह शब्द किसकी अनुमति से लिखे गए, किस अधिकारी ने इसे देखा, और किसने जानबूझकर अनदेखी की। या फिर यह मान लिया जाए कि नगर निगम में अब जवाबदेही सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई है।अब सवाल सिर्फ कूड़ा डालने का नहीं है।सवाल यह है कि शहर की दीवारों पर गंदी भाषा कौन लिख रहा है,और उस पर कार्रवाई कब होगी?
