हरिद्वार – रानीपुर विधानसभा के ग्राम रावली महदूद और शिवालिक नगर से गुजरने वाले बरसाती नाले पर वर्षों से जमे अतिक्रमण ने हर मानसून में स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं, लेकिन आरोप है कि 15 साल के कार्यकाल में भी इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। अब जिलाधिकारी की सख्ती के बाद अचानक यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
हर बारिश में डूबते घर-दुकान, शिकायतों का लंबा इतिहास।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नाले पर हुए अतिक्रमण के कारण बरसात में पानी की निकासी बाधित हो जाती है, जिससे आसपास के घरों और दुकानों में पानी घुस जाता है और हर साल नुकसान झेलना पड़ता है। निवासियों ने कई बार जनप्रतिनिधियों तक यह समस्या पहुंचाई, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
DM की सख्ती के बाद ग्राउंड पर हलचल।
मानसून से पहले जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बैठक कर सभी बरसाती नालों से अतिक्रमण हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए। इसी क्रम में उन्होंने रावली महदूद पहुंचकर मौके का निरीक्षण किया और नाले की सफाई तथा अतिक्रमण हटाने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए। निरीक्षण के बाद प्रशासनिक मशीनरी हरकत में नजर आई।
विधायक पर उठे सवाल, समय पर क्यों नहीं दिखी समस्या?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल तेज है कि जब समस्या वर्षों से मौजूद थी, तो जनप्रतिनिधि स्तर पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई। लोगों का कहना है कि अगर पहले कदम उठाए जाते तो हर साल होने वाले नुकसान से बचा जा सकता था।
अब निगाहें कार्रवाई पर
प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने और नाले की सफाई के लिए निर्देश दे दिए हैं। अब देखना होगा कि यह अभियान कितनी तेजी से जमीन पर उतरता है और क्या इस बार मानसून से पहले लोगों को राहत मिल पाती है या नहीं।
