February 9, 2026
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उत्तराखंड में 17 दिसंबर से 30 जनवरी तक सभी जिलों में संचालित “सरकार जनता के द्वार” कार्यक्रम भले ही राज्यव्यापी रहा हो, लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मॉडल जिले चंपावत में इन शिविरों ने जिला प्रशासन के प्रति जनता के भरोसे को नई मजबूती दी। जिले में आयोजित शिविरों में यह साफ दिखाई दिया कि कोई भी पात्र व्यक्ति खाली हाथ या निराश होकर वापस नहीं लौटा। विषम भौगोलिक परिस्थितियों और आर्थिक तंगी के कारण जिला मुख्यालय तक न पहुंच पाने वाले वृद्धजन, विधवा महिलाएं, पुरुष, दिव्यांगजन एवं अन्य पात्र लोग, जो वर्षों से पेंशन और सरकारी सुविधाओं से वंचित थे, इन शिविरों के माध्यम से लाभान्वित हुए।

कई लोगों का फिंगरप्रिंट न निकल पाने के कारण आधार कार्ड से जुड़ी समस्याओं के चलते सरकारी योजनाएं उनके लिए केवल सपना बन गई थीं, लेकिन जिलाधिकारी मनीष कुमार ने ऐसे मामलों में भी वैकल्पिक रास्ते निकालते हुए पेंशन स्वीकृत कराई, जिससे जरूरतमंदों के चेहरों पर खुशी लौट आई। गत वर्ष जून माह के तीसरे सप्ताह में जिलाधिकारी का पदभार संभालने के बाद डीएम मनीष कुमार द्वारा कलेक्ट्रेट में “जनता मिलन कार्यक्रम” की शुरुआत की गई, जिसका व्यापक असर देखने को मिला। अब तक लगभग 4000 से अधिक लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं सहायता से जोड़ा जा चुका है। वहीं ग्रामीणों के आग्रह पर रात्रि चौपाल आयोजित किए जाने से लोगों का मनोबल बढ़ा है और उन्हें प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याएं रखने में भी आसानी हुई है, जिससे जिला प्रशासन के प्रति विश्वास लगातार मजबूत होता गया।

डेढ़ माह की अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों के 27 स्थानों पर “सरकार जनता के द्वार” कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें कुल 24,558 लोगों ने सहभागिता की। इस दौरान 7,460 लोगों ने अपनी समस्याएं व मांगें रखीं, जिनमें से 6,507 का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया। शिविरों के दौरान 2,480 विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र बनाकर लोगों को बड़ी राहत दी गई, जबकि 15,464 लोगों को स्वास्थ्य, कृषि, बागवानी, बाल विकास, पशुपालन, समाज कल्याण सहित अन्य विभागों के माध्यम से सहायता प्रदान की गई। सरकार जनता के द्वार कार्यक्रम की सफलता पर जिलाधिकारी मनीष कुमार ने संतोष व्यक्त करते हुए सभी जिला स्तरीय अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीण जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार जताया और कहा कि प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद ही शासन की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।



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